Dausa News: राजस्थान के दौसा जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली एक तस्वीर सामने आई है. यहां सीकराय उपखंड के कालवान गांव में रास्ते के अभाव और दबंगों के अतिक्रमण के चलते एक परिवार को अपने परिजन का शव दीवार फांदकर खेतों के रास्ते श्मशान ले जाना पड़ा. इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि ग्रामीणों के आक्रोश को भी चरम पर पहुंचा दिया है.
एम्बुलेंस तक नहीं पहुंच सकी ढाणी
मामला नले वाली प्रजापतों की ढाणी का है, जहां निवासी गिरिराज प्रसाद प्रजापत के निधन के बाद अंतिम संस्कार के लिए श्मशान ले जाने का मुख्य रास्ता बंद मिला. परिजनों का आरोप है कि रास्ते पर अतिक्रमण होने के कारण आपात स्थिति में एम्बुलेंस भी ढाणी तक नहीं पहुंच सकी. जिसकी वजह से अंतिम संस्कार के लिए शमशान ले जाने का जब मुख्य रास्ता नहीं मिला, तो मजबूरी में परिजनों को शव को कंधे पर उठाकर दीवार फांदनी पड़ी और खेतों के कीचड़ भरे रास्तों से गुजरना पड़ा.
शव लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे ग्रामीण
प्रशासनिक अनदेखी से नाराज परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार करने के बजाय शव को लेकर सीधे एसडीएम कार्यालय पहुंच गए. कार्यालय के बाहर शव रखकर प्रदर्शन की सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीएम नवनीत कुमार, मानपुर एसएचओ और तहसीलदार हेमेंद्र मीणा तुरंत मौके पर पहुँचे और ग्रामीणों से वार्ता की.
7 दिन के भीतर रास्ता खुलवाने का दिया भरोसा
प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुई समझाइश के बाद, अधिकारियों ने 7 दिन के भीतर रास्ता खुलवाने और अतिक्रमण हटाने का आश्वासन दिया. इस निर्धारित समय सीमा के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए सहमत हुए.
7 दिन का अल्टीमेटम, फिर होगा आंदोलन
ग्रामीणों ने बताया कि प्रजापतों की ढाणी को जोड़ने वाली सीसी रोड पर लंबे समय से अतिक्रमण है. पूर्व में भी इसे हटाया गया था, लेकिन कुछ रसूखदारों ने फिर से रास्ता बंद कर दिया. अधिकारियों ने ग्रामीणों को लिखित आश्वासन दिया है कि 7 दिन के भीतर हर हाल में अतिक्रमण हटाकर रास्ता खोल दिया जाएगा. इस भरोसे के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे.
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