Rajasthan News: राजस्थान के दौसा शहर में मकर संक्रांति का जश्न उस वक्त मातम में बदल गया जब एक बैलून वाली पतंग की चिंगारी ने मंडी रोड पर दुर्गा मंदिर के पीछे बने लकड़ी के गोदाम को आग की लपटों में घेर लिया. रिहायशी इलाके में हुई इस घटना ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया. देखते ही देखते आग ने करीब एक हजार वर्ग गज के गोदाम को अपनी जद में ले लिया. काला धुआं दो से तीन किलोमीटर दूर तक आसमान में फैल गया जिससे आसपास के लोग घर छोड़कर भागने लगे.
फायर ब्रिगेड की टीमों ने दो घंटे जूझकर पाया काबू
सूचना मिलते ही दौसा की फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची लेकिन लकड़ी और जलने वाली चीजों की वजह से आग बेकाबू हो गई. हालात बिगड़ते देख लालसोट बांदीकुई और जयपुर से अतिरिक्त दमकल गाड़ियां बुलाई गईं. फायर ब्रिगेड सिविल डिफेंस पुलिस और स्थानीय लोगों के सहयोग से दो घंटे की कड़ी मेहनत के बाद आग पर नियंत्रण पाया जा सका.
इस दौरान गोदाम के शीशे टूट गए दीवारें क्षतिग्रस्त हो गईं और पास के दुर्गा मंदिर की दीवार भी आग की चपेट में आ गई. आसपास के घरों से लोगों ने सतर्कता बरतते हुए गैस सिलेंडरों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जिससे बड़ा हादसा टल गया.
भीड़ का उमड़ा सैलाब, पुलिस को संभालना पड़ा मुश्किल
घटना स्थल पर श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों की भारी भीड़ जमा हो गई. मंदिर की दीवार को नुकसान पहुंचने से गुस्साए लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और विरोध जताया.
वहीं मौके पर एडीएम लालसोट मनमोहन मीणा (जो चश्मा लगाए हुए थे) एसडीएम संजू मीणा एएसपी हेमंत जायसवाल उपाधीक्षक दौसा धर्मेंद्र कुमार शर्मा कोतवाल भगवान सहाय शर्मा जैसे वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे और स्थिति को संभाला.
अवैध गोदामों पर उठे सवाल, पहले भी हो चुकीं घटनाएं
प्रारंभिक जांच से पता चला कि मकर संक्रांति पर उड़ाई जा रही बैलून वाली पतंग ही आग का मुख्य कारण बनी. यह घटना दौसा में रिहायशी इलाकों में बने अवैध गोदामों और प्रशासन की लापरवाही को फिर से उजागर करती है. पहले भी ऐसी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं लेकिन कोई ठोस कदम न उठाने से ये हादसे बार-बार हो रहे हैं.
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