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जूनियर अकाउंटेंट की मौत के बाद फंदे पर झूला अफसर, शादी के कार्ड पर लिखा सुसाइड नोट

एक दिन पहले जिस अफसर पर हत्या का केस दर्ज हुआ, अगले दिन उसी का शव फंदे से लटकता मिला. दौसा के इस हाई-प्रोफाइल केस में अब एक तहसीलदार की एंट्री ने सबको चौंका दिया है. जानिए क्या है दोनों मौतों का कनेक्शन.

जूनियर अकाउंटेंट की मौत के बाद फंदे पर झूला अफसर, शादी के कार्ड पर लिखा सुसाइड नोट
दौसा के महवा में उप कोषाधिकारी मनोज मीणा ने किया सुसाइड. (फाइल फोटो)
NDTV Reporter

Dausa News: राजस्थान के दौसा जिले के सिकराय में कार्यरत उप कोषाधिकारी मनोज कुमार मीणा शुक्रवार को महवा स्थित अपने आवास पर फंदे से लटके मिले. इस घटना ने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया. मनोज मीणा की आत्महत्या का यह मामला एक अन्य घटना से जुड़ा हुआ है. 

दरअसल, 10 जून को सिकराय उप कोषागार कार्यालय में कार्यरत जूनियर अकाउंटेंट शीतल मीणा की तबीयत अचानक खराब हो गई थी. उन्हें जयपुर रेफर किया गया, जहां 11 जून को उनकी मौत हो गई. शीतल के परिजनों ने मनोज मीणा पर जहर देकर हत्या करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था. पुलिस इस मामले की जांच कर ही रही थी कि शुक्रवार को मनोज मीणा ने भी फांसी लगाकर अपनी जान दे दी.

शादी के कार्ड पर सुसाइड नोट

मृतक मनोज मीणा के पास से एक शादी के कार्ड पर लिखा सुसाइड नोट बरामद हुआ है. इस कथित सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी मौत के लिए भुसावर के तहसीलदार अरुण मीणा और उनके रिश्तेदार सोनू मीणा को जिम्मेदार ठहराया है. सुसाइड नोट में मनोज के साइन भी मौजूद हैं.

तहसीलदार पर ब्लैकमेलिंग के आरोप

मृतक के भाई विक्रम सिंह मीणा ने महवा थाने में जो FIR दर्ज कराई है उसके अनुसार, शीतल मीणा की मौत के बाद तहसीलदार अरुण मीणा और सोनू मीणा ने मनोज को ब्लैकमेल करने और फंसाने के उद्देश्य से फोन पर और व्यक्तिगत रूप से धमकियां दीं. 11 जून की रात को मनोज ने अपने ससुर और परिवार के अन्य सदस्यों को इन धमकियों के बारे में बताया था. परिवार वालों ने मनोज को समझाया था कि वे सुबह सीओ को इसकी शिकायत करेंगे, लेकिन धमकियों से परेशान होकर मनोज ने रात में ही आत्महत्या कर ली. पुलिस ने विक्रम सिंह की रिपोर्ट के आधार पर BNS 2023 की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 61(2)(A) के तहत नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

अस्पताल में हंगामा, शव लेने से इनकार

मनोज मीणा की मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन महवा अस्पताल परिसर में जमा हो गए. परिजनों ने चेतावनी दी है कि जब तक सुसाइड नोट में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक वे शव नहीं उठाएंगे. थाने के बाहर प्रदर्शन के बाद अब अस्पताल परिसर में धरना लगातार जारी है.

विधायक मिलने पहुंचे, पुलिस कर रही समझाइश

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है. पूर्व विधायक ओमप्रकाश हुडला महवा अस्पताल पहुंचे और धरने पर बैठे परिजनों से मुलाकात कर उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया. इससे पहले महवा के वर्तमान विधायक राजेंद्र मीणा भी महवा थाने पहुंचे थे और पुलिस अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली.

फिलहाल, भारी पुलिस बल और प्रशासन के अधिकारी मौके पर मौजूद हैं. महवा थानाधिकारी महेन्द्र यादव और अन्य अधिकारी आक्रोशित परिजनों से लगातार समझाइश का प्रयास कर रहे हैं. पुलिस सुसाइड नोट, कॉल डिटेल्स और अन्य साक्ष्यों के आधार पर दोनों मौतों के कनेक्शन और आत्महत्या के असली कारणों की गहनता से पड़ताल कर रही है.

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