Rajasthan English Medium School Closed: राजस्थान सरकार की ओर से महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल को लेकर समीक्षा की जा रही है. जिसके बाद फैसला लिया जाएगा की इसे बंद कर दिया जाए या फिर हिंदी माध्यम स्कूलों में बदल दिया जाए. चूंकि यह अंग्रेजी माध्यम स्कूल कांग्रेस की गहलोत सरकार में लायी गई थी. ऐसे में इस पर सियासत तेज हो गई है. माना जा रहा है कि अंग्रेजी माध्यम स्कूल को लेकर बजट में घोषणा की जा सकती है. लेकिन इससे पहले नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने इसका कड़ा विरोध किया है.
राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राजस्थान सरकार द्वारा अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को हिंदी माध्यम विद्यालयों में बदले जाने के फैसले का पुरजोर शब्दों में विरोध किया है. जूली ने कहा कि राजस्थान सरकार का यह फैसला प्रदेश के गरीब, पिछड़े, शोषित, वंचित और ग्रामीण परिवेश के बच्चों के भविष्य के प्रति संकीर्ण सोच को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि यह विचारणीय विषय है कि भाजपा सरकार को ग्रामीण, गरीब, और पिछड़ों के बच्चों से इतनी नफ़रत क्यों है.
बच्चों की शिक्षा के भविष्य पर गहरी चोट
जूली ने कहा कि यह तुगलकी फरमान जारी कर सरकार ने प्रदेश के गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों की शिक्षा के भविष्य पर गहरी चोट पहुंचाई है. जूली ने कहा कि इस प्रतिस्पर्धा के युग में अमीरों के बच्चे तो महंगे निजी स्कूलों में पढ़ सकते हैं, लेकिन गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के पास तो कांग्रेस सरकार द्वारा खोले गए सरकारी अंग्रेजी माध्यम के स्कूल ही एकमात्र विकल्प हैं, इन्हें भी सरकार बंद करके प्रदेश के हजारों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है.
AI के दौर में अंग्रेजी शिक्षा की जरूरत
प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI के इस दौर में आज हर क्षेत्र में अंग्रेजी की जरूरत है, चाहे वह उच्च शिक्षा हो, नौकरियां हों या व्यापार. सरकार के इस फैसले से राजस्थान के छात्र देश-दुनिया में पिछड़ेगे. उन्होंने कहा कि भाजपा की हमेशा से ही यह मंशा रही है कि गरीबों और ग्रामीणों के बच्चों को अच्छी शिक्षा से वंचित रखा जाय. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदेश के गरीब, मध्यम वर्ग एवं ग्रामीण परिवेश के बच्चों को अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा से क्यों वंचित रखा जा रहा है?
जूली ने कहा कि हम सरकार के इस गरीब, पिछड़े और दलित विरोधी तानाशाही पूर्ण फैसले का पुरजोर शब्दों में विरोध करते हैं और मांग करते हैं कि सरकार इस शिक्षा विरोधी फरमान को तुरंत वापस ले.
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