Ground Report: डीग के गुलपाड़ा में विकास के दावे 'फिसले', सरपंच के 5 साल के काम को जनता ने दिया 'जीरो' नंबर

Rajasthan Panchayat Election 2026: डीग जिले के गुलपाड़ा गांव में पंचायत चुनाव से पहले विकास को लेकर यहां के ग्रामीणों में भारी आक्रोश दिखा . जर्जर सड़कों, पानी की किल्लत ने गांव में विकास पोल खोल के रख दी. इसी गुस्से में यहां के लोगों ने अपने सरपंच प्रतिनिधि को 10 में 0 अंक दिए है.

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Gulpada Village Issues
NDTV

Gulpada Village Issues: राजस्थान में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है, लेकिन डीग जिले की बृज नगर पंचायत के गुलपाड़ा गांव में चुनावी सरगर्मी से ज्यादा लोगों के चेहरों पर नाराजगी नजर आ रही है.यहां के ग्रामीणों का कहना है कि बीते पांच साल उनके लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहे. मूलभूत सुविधाओं के नाम पर गांव में केवल कीचड़, टूटी सड़कें और खाली बर्तन रह गए हैं.

सड़क पर विकास नहीं, केवल दलदल और गड्ढे दिखे

गुलपाड़ा गांव की सड़कों पर  बजरी सीमेंट से बनी सड़क कम दिखी उससे ज्यादा उसमें  गड्ढे  नजर आए. जो  विकास के दावों की पोल खोल रहे थे. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, बरसात न होने के बावजूद यहां जलभराव की स्थिति बनी रहती है. एक वाहन चालक ने बताया कि गड्ढे इतने गहरे हैं कि नई बाइक भी एक साल में कबाड़ हो जाती है. यहां से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं.अगर रोज चलाओ तो बाइक एक साल में कबाड़ हो जाए

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6 महीने में एक बार पाइपलाइन में आता है पानी 

गांव की इंदिरा कॉलोनी में पानी की समस्या विकराल है.चंबल पाइपलाइन डलने के बावजूद महिलाओं को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है. रामा नामक एक महिला ने बताया कि उन्हें 1 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है या फिर 15 रुपये प्रति पीपा देकर पानी खरीदना पड़ रहा है. महिलाओं का आरोप है कि पाइपलाइन के नाम पर पैसे तो लिए गए, लेकिन सुविधा के नाम पर लाइन में 6 महीने में एक बार ही पानी आता है.सबसे बड़ी बात, सरपंच आज तक हमारी समस्या सुनने हमारे पास नहीं आया.ऐसे सरपंच को हम 10 में से शून्य नंबर देते हैं," 

जून-जुलाई में 3-3 फुट भर जाता है पानी

गुलपाड़ा के मुख्य बाजार में भी रास्ते टूटे हुए और जलभराव से भरे मिले. दुकानदारों ने बताया कि जून-जुलाई में यहां 3-3 फुट पानी भर जाता है. रोज कोई न कोई गिरकर चोटिल होता है. अप्रैल की भीषण गर्मी में जब इतना जलभराव है, तो बरसात में क्या हाल होगा?" एक स्थानीय व्यक्ति ने कुछ दिन पुराने वीडियो भी दिखाए, जिसमें सरसों से भरी बोरियां पानी में गिरी हुई थीं.

ये सड़कें PWD के अधीन हैं.मैं कुछ नहीं कर सकता-  सरपंच प्रतिनिधि

हैरानी की बात यह है कि जब इन मुद्दों पर सरपंच प्रतिनिधि भारत सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.  पूर्व में भी जब रास्तों के मुद्दे पर सरपंच प्रतिनिधि से बात करने की कोशिश की गई थी तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ दिया था कि ये सड़कें PWD के अधीन हैं.मैं कुछ नहीं कर सकता. 

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