Rajasthan News: राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को सदन में उस समय ठहाके गूंज उठे और माहौल गरमा गया, जब भरतपुर के बहनेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के भवन निर्माण का मुद्दा उठा. चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर और पूर्व मंत्री व आरएलडी विधायक सुभाष गर्ग के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली. मंत्री खींवसर ने गर्ग पर तंज कसते हुए यहां तक कह दिया कि 'आपको आम खाने हैं या पेड़ गिनने हैं?'
'कलेक्टर से लिखित जिम्मेदारी लेनी चाहिए'
दरअसल, विधायक सुभाष गर्ग ने शून्यकाल के दौरान बहनेरा CHC का मुद्दा उठाते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि भरतपुर के जिला कलेक्टर की 'हठधर्मिता' के कारण इस अस्पताल का निर्माण कार्य रुका हुआ है. गर्ग ने मांग की कि अगर मौजूदा जर्जर भवन की छत गिरती है, तो कलेक्टर से इसकी लिखित जिम्मेदारी (Undertaking) लेनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अड़चनों की वजह से जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
मंत्री बोले- 'ये ज्योतिषी का चक्कर है क्या?'
गर्ग के सवालों का जवाब देने उतरे चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने मोर्चा संभालते हुए पुरानी कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने कहा, 'यह घोषणा 2022-23 में आपको (सुभाष गर्ग) खुश करने के लिए की गई थी. उस समय राजनीतिक दबाव में नियमों को ताक पर रखा गया, जबकि वहां CHC बनाना तकनीकी रूप से सही नहीं था.'
खींवसर के बनाया CHC क्यों परफेक्ट नहीं
मंत्री खींवसर ने सदन के सामने कुछ तकनीकी तथ्य रखे, जिनसे बहस और बढ़ गई. उन्होंने बताया कि प्रस्तावित जगह मेडिकल कॉलेज से महज 7 किलोमीटर दूर है. ओपीडी में रोजाना बमुश्किल 50 मरीज ही आते हैं. CHC के लिए निर्धारित मानकों के मुकाबले वहां भूमि पर्याप्त नहीं है.
'आपको फल खाने से मतलब है या पेड़ गिनने से'
जब गर्ग ने अपनी बात पर जोर दिया, तो खींवसर ने चुटकी लेते हुए कहा, 'गर्ग साहब, आपको फल खाने से मतलब है या पेड़ गिनने से?' उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार बची हुई जमीन पर वर्टिकल बिल्डिंग बनाकर समाधान निकालने की कोशिश करेगी, लेकिन अच्छी-भली पुरानी बिल्डिंग को नियमों के खिलाफ जाकर नहीं तोड़ा जाएगा.
सत्ता और विपक्ष में तीखी नोकझोंक
पूरी बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच भी छींटाकशी चलती रही. सुभाष गर्ग ने स्पष्ट किया कि उनकी कोई व्यक्तिगत जिद नहीं है, लेकिन नेशनल हाईवे पर होने के कारण वह जगह महत्वपूर्ण है. फिलहाल यह मामला प्रशासनिक और तकनीकी पेचों के बीच फंसा हुआ है, लेकिन सदन में हुई इस 'जुबानी जंग' की चर्चा गलियारों में खूब हो रही है.
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