Rajasthan: सरकारी आदेश पर ध्वस्त हुई जर्जर स्कूल भवन, अब टीन शेड और धर्मशालाओं में बच्चे पढ़ने को मजबूर

स्कूलों में बच्चे टेंट, मंदिरों, धर्मशालाओं और पेड़ों की छांव में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं. शिक्षा विभाग की ओर से फिलहाल सभी स्कूलों के लिए वैकल्पिक भवनों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो पाई है.

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झालावाड़ में जर्जर स्कूल गिरे लेकिन नहीं बने मकान

Rajasthan School: राजस्थान सरकार लगातार स्कूल भवन की जर्जर हालत को ठीक करने का दावा कर रही है. हालांकि शिक्षा विभाग की ओर से पैसे की कमी की भी बात कही गई थी. ऐसे में सरकारी निर्देश पर जर्जर स्कूल भवनों को ध्वस्त तो कर दिया गया है. लेकिन बच्चों को अब मंदिर, धर्मशाला और टीन शेड में पढ़ने को मजबूर किया जा रहा है. ऐसा ही मामला झालावाड़ जिले से आया है. जहां सरकारी स्कूल भवनों को जर्जर घोषित कर लगातार ध्वस्त किए जाने का मामला अब शिक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है.

पिछले 9 महीनों में जिले के 316 स्कूल भवनों को जमींदोज किया जा चुका है, जबकि अब 154 और स्कूल भवनों को हटाने की तैयारी चल रही है. ऐसे में नए शिक्षा सत्र में 70 हजार से अधिक विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है.

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छात्र पेड़ों की छांव में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर

हालात यह हैं कि कई स्कूलों में बच्चे टेंट, मंदिरों, धर्मशालाओं और पेड़ों की छांव में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं. शिक्षा विभाग की ओर से फिलहाल सभी स्कूलों के लिए वैकल्पिक भवनों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो पाई है. जानकारी के अनुसार सरकार ने पिपलोदी स्कूल हादसे के बाद जर्जर और खतरनाक भवनों को गिराने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद जिलेभर में अभियान चलाकर पुराने भवन हटाए जा रहे हैं. हालांकि नए भवनों के निर्माण की गति बेहद धीमी है. अभी तक केवल 15 स्कूल भवनों के लिए करीब 15.26 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है, जबकि सैकड़ों स्कूल अब भी नए भवनों का इंतजार कर रहे हैं.

नए भवनों को स्वीकृति मिलने की उम्मीद

जिले के अकलेरा और मनोहरथाना क्षेत्र में सबसे अधिक स्कूल भवन प्रभावित हुए हैं. कई गांवों में कक्षाएं खुले मैदानों, सामुदायिक भवनों और धार्मिक स्थलों में संचालित की जा रही हैं. अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों पर संकट खड़ा हो गया है. शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन भवनों को गिराया गया है, वे पूरी तरह जर्जर हो चुके थे और बच्चों के लिए खतरा बने हुए थे. विभाग ने नए भवनों के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजे हैं और जल्द स्वीकृति मिलने की उम्मीद जताई है.

इधर, शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते नए भवन तैयार नहीं हुए तो आगामी सत्र में शिक्षण व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी. ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा परेशानी सामने आ रही है, जहां वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी सीमित हैं.

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