मानव और वन्यजीव संघर्ष में मृत्यु होने पर मिलेगी दोगुनी मुआवजा राशि, नियमों में किया जा रहा संशोधन

राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2022 में जारी आदेश के तहत मानव और वन्यजीव संघर्ष में मृत्यु होने पर प्रभावित परिवार को पांच लाख रुपये की सहायता राशि का प्रावधान है.

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Rajasthan Assembly:  राजस्थान में मानव और वन्यजीव संघर्ष में किसी जनहानि पर प्रभावित परिवार को दी जाने वाली सहायता राशि दोगुनी कर 10 लाख रुपये की जाएगी. वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा ने मंगलवार को विधानसभा में यह जानकारी दी. शर्मा ने कहा कि वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2022 में जारी आदेश के तहत मानव और वन्यजीव संघर्ष में मृत्यु होने पर प्रभावित परिवार को पांच लाख रुपये की सहायता राशि का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा इस प्रकार की घटनाओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए इस राशि को दोगुना करने पर विचार किया गया है और इसके लिए नियमों में संशोधन किया जा रहा है.

मंत्री संजय शर्मा ने कहा, “संशोधन के बाद राज्य सरकार द्वारा इस प्रकार की दुर्घटनाओं में मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपये की राशि दी जाएगी.”

सदन में संजय शर्मा ने दी अहम जानकारी

इसके साथ ही संजय शर्मा ने बताया कि करौली बाघ अभयारण्य में आने वाले गांवों के निवासियों को उनकी सहमति के बिना विस्थापित नहीं किया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि अभयारण्य के अन्तर्गत आने वाली बंजर भूमि पर यदि कोई ग्रामीण खेती कर रहा है तो इस संबंध में विभागीय नियमों में मुआवजे का प्रावधान नहीं है.

प्रश्नकाल के दौरान विधायक जसवंत सिंह गुर्जर द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि धौलपुर-करौली में ‘क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट' (सीटीएच) के लिए उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार समिति गठित की गई थी और उसकी की रिपोर्ट शीर्ष अदालत में पेश की गई. इसके बाद ही सीटीएच का निर्धारण किया गया है.

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इससे पहले मूल प्रश्न के लिखित जवाब में मंत्री शर्मा ने बताया कि वर्तमान में धौलपुर-करौली में सीटीएच के अन्तर्गत आने वाले गांव में स्वैच्छिक विस्थापन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है.

उन्होंने बताया कि बाडी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत धौलपुर-करौली बाघ अभयारण्य में भविष्य में सीटीएच में आने वाले गांवों का जब कभी भी स्वैच्छिक विस्थापन होगा तो दो नवंबर 2002 तथा 24 जुलाई 2025 को राज्य सरकार एवं 21 फरवरी 2008 को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा-निर्देश के तहत मुआवजा दिया जाएगा.

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