Rajasthan: 'हर टेंडर पर ठेकेदारों से 2-3 परसेंट की रिश्वत ले रहे थे', महेश जोशी की गिरफ्तारी के बाद ED का दावा

JJM Corruption News: 900 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन घोटाले में ईडी द्वारा गिरफ्तार किए गए पूर्व मंत्री महेश जोशी ने प्रवर्तन निदेशालय में टेंडर, 'फर्जी' कार्य अनुभव प्रमाण पत्र, टेंडर देने आदि सहित विभिन्न कार्यों के लिए 2-3 प्रतिशत रिश्वत ली.

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Mahesh Joshi

Mahesh Joshi News: जल जीवन मिशन के 900 करोड़ के घोटाले में राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को ईडी ने दो दिन पहले यानी 24 अप्रैल को गिरफ्तार किया था. जिसके बाद उन्हें चार दिन की रिमांड पर भेज दिया गया है. कोर्ट के आदेश के मुताबिक महेश जोशी अब सोमवार तक ईडी की हिरासत में रहेंगे, जहां उनसे विस्तार से पूछताछ की जा रही है.

ईडी के आरोपो से पूर्व मंत्री ने साफ किया इंकार

इस पूछताछ के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को पूर्व मंत्री पर जल जीवन मिशन ( JJM) के कुछ ठेकेदारों से टेंडर राशि का 2-3 प्रतिशत 'रिश्वत' के रूप में लेने का आरोप लगाया. जयपुर में प्रवर्तन निदेशालय कार्यालय के बाहर पत्रकारों से बातचीत में पूर्व मंत्री ने ईडी द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए किसी भी गलत काम से साफ इनकार किया.

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एसीबी की एफआईआर से मामला सामने आया

उन्होंने अपने खिलाफ लगे आरोपों से इनकार किया है. वहीं, ईडी ने अपने आरोप में कहा कि कथित मनी लॉन्ड्रिंग का मामला राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की एक एफआईआर से सामने आया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी के मालिक पद्मचंद जैन, श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के महेश मित्तल और अन्य लोगों ने अवैध संरक्षण प्राप्त करके टेंडर और बिल स्वीकृत करवाने के लिए अधिकारियों को रिश्वत दी और विभिन्न पीएचईडी टेंडरों में उनके द्वारा किए गए कार्यों में अनियमितताओं को छिपाया.

2-3 प्रतिशत रिश्वत के रूप में ले रहे थे पूर्व मंत्री

इसमें यह भी दावा किया गया है कि संदिग्ध लोग पीएचईडी के ठेके हासिल करने के लिए इरकॉन द्वारा जारी किए गए 'फर्जी' कार्य अनुभव प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल करने में शामिल थे. पूर्व मंत्री ने अपने करीबी सहयोगी संजय बदया के साथ मिलकर पद्मचंद जैन और महेश मित्तल जैसे ठेकेदारों से जेजेएम कार्यों से संबंधित निविदाएं देने और विभिन्न अनियमितताओं को छिपाने के लिए रिश्वत ली. जिसमें वह  पक्ष लेने और विभिन्न अनियमितताओं को छिपाने के लिए इन ठेकेदारों से निविदा राशि का 2-3 प्रतिशत रिश्वत के रूप में ले रहे थे.

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