समय रहते इंतजाम नहीं किए गए तो राजस्थान में गहरा सकता है बिजली संकट, जानिए क्या है वजह?

राजस्थान में बिजली उत्पादन की समस्या जल्द विकराल रूप ले सकती है अगर प्रदेश के बिजलीघरों के लिए जल्द कोयले की कमी का इंतजाम नहीं किया गया. अभी यह और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि छत्तीसगढ़ के परसा पूर्व और कांटा बासन ब्लॉक में कोयले का उत्पादन रुकने से राजस्थान में कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई है. परसा पूर्व और कांटा बासन ब्लॉक छत्तीसगढ़ में स्थित है, जहां अगले महीने चुनाव होने हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रदेश की निवर्तमान कांग्रेस सरकार के मुखिया अशोक गहलोत ने विधानसभा चुनाव 2023 में सत्ता में पुर्नवापसी के लिए जनता को 100 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया है, लेकिन प्रदेश में पहले से बरकरार कोयले की कमी से बिजलीघरों में बिजली उत्पादन पहले से प्रभावित है, जिससे बिजली की आपूर्ति बड़ी समस्या बनी हुई है.

प्रदेश में विकराल रूप ले सकती है बिजली की समस्या 

राजस्थान में बिजली उत्पादन की समस्या जल्द विकराल रूप ले सकती है अगर प्रदेश के बिजलीघरों के लिए जल्द कोयले की कमी का इंतजाम नहीं किया गया. अभी यह और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि छत्तीसगढ़ के परसा पूर्व और कांटा बासन ब्लॉक में कोयले का उत्पादन रुकने से राजस्थान में कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई है. परसा पूर्व और कांटा बासन ब्लॉक छत्तीसगढ़ में स्थित है, जहां अगले महीने चुनाव होने हैं.

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कोयले की कमी से राजस्थान में पहले से ही मांग की तुलना में बिजली उत्पादन कम हो रहा है. इसकी मूल वजह प्रदेश में कोयले की कमी है, जिसके चलते 7 बिजली घर पहले ही बंद हो चुके हैं. इनमें कोटा, सूरतगढ़, छाबरा और कालीसिंध समेत अन्य बिजली घर यूनिट्स शामिल हैं. 

परसा पूर्व व कांटा बासन ब्लॉक में उत्पादन रूका

रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ के परसा पूर्व और कांटा बासन ब्लॉक में उत्पादन रुकने से राजस्थान में कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई है. एक अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि कांग्रेस शासित दोनों राज्यों क्रमशः छत्तीसगढ़ और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों के बीच इस मुद्दे पर पिछले दिनों कई बैठकें हुई हैं. अधिकारी ने बताया कि राजस्थान सरकार और केंद्र द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार से इस बारे में कई बार अनुरोध किया गया है, लेकिन उसका वांछित नतीजा नहीं मिला है.

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URVUNL के पास है कोयला खदान का स्वामित्व

दरअसल, छत्तीसगढ़ में 1.5 करोड़ टन सालाना क्षमता की कोयला खदान का स्वामित्व राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) के पास है. पिछले साल फरवरी में पर्यावरण मंत्रालय ने चरण-दो के परिचालन के लिए 1,898.32 हेक्टेयर के गैर-वानिकी उपयोग की मंजूरी दी थी. वित्त वर्ष 2023-24 तक खनन कार्यों को जारी रखने के लिए 141 हेक्टेयर वन भूमि को सौंपने और पेड़ों की कटाई की जरूरत है.

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अधिकारी ने कहा कि 141 हेक्टेयर वन भूमि में से 43.63 हेक्टेयर पर पेड़ों की कटाई का काम पूरा हो चुका है और करीब 91.21 हेक्टेयर वन भूमि को कोयला उत्पादन जारी रखने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सौंपा जाना बाकी है. यदि पेड़ों की कटाई तुरंत नहीं की गई, तो वित्त वर्ष 2023-24 में करीब 90 लाख टन कोयला उत्पादन का नुकसान हो सकता है.

URVUNL के पावर प्लांट के लिए आवंटित हुआ ब्लॉक

उल्लेखनीय है गहलोत सरकार ने एक पत्र जारी कर राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमटेड के 4340 मेगावाट वाले पावर प्लांट के लिए छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य कोलफील्ड में परसा ईस्ट एवं कांता बासन कोल ब्लॉक आवंटित किया है, जहां खनन कार्य जोर-शोर से चले, इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार से वनभूमि पर माइनिंग के लिए आवश्यक अनुमित भी मिल गई, लेकिन अब तक पर्याप्त भूमि सौंपी नहीं गई है. इससे वहां माइनिंग एक्टिविटी बंद सी हो गई, जिससे राजस्थान के बिजलीघरों में कोयला नहीं पहुंच रहा है और प्लांट में प्रोडक्शन बाधित हो रहा है.

परसा पूर्व और कांटा बासन ब्लॉक में कोयला उत्पादन बंद

अधिकारी ने बताया कि परसा पूर्व और कांटा बासन ब्लॉक में कोयला उत्पादन बंद हो गया है, इसलिए राजस्थान को कोयले की आपूर्ति बनाए रखना मुश्किल हो रहा है. हालांकि, केंद्र ने एक विशेष उपाय के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया लिमिटेड के जरिये अतिरिक्त कोयला आवंटित किया है. अधिकारी ने बताया कि इस कोयले को कोल इंडिया की इकाई भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) और अन्य दूरदराज के स्थानों से लाना पड़ रहा है, जिससे राजस्थान के लिए लागत ऊंची बैठ रही है.

बिजलीघरों की स्थापना में 29,000 करोड़ रुपए का निवेश

मालूम हो, प्रदेश के कई बिजलीघरों की स्थापना में राज्य सरकार ने 29,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है, लेकिन इन मेगा प्रोजेक्ट में प्रोडक्शन तभी होगा जब उन्हें छत्तीसगढ़ में आवंटित कोल ब्लॉक से नियमित रूप से पर्याप्त कोयला मिलेगा. माना जा रहा है कि अगर जल्द कोयले की कमी का इंतजाम नहीं किया गया तो प्रदेश के बिजलीघर नहीं चलेंगे तो राज्य में  बिजली संकट पैदा हो सकता है.

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