Rajasthan Marvel Industries: राजस्थान के किशनगढ़ को देश के सबसे बड़े मार्बल मंडियों के लिए जाना जाता है. लेकिन मौजूदा समय में वैश्विक परिस्थितियों की वजह से जूझ रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध और कच्चे माल की सप्लाई में आ रही बाधाओं ने इस उद्योग की रफ्तार को धीमा कर दिया है. हालात ऐसे हैं कि मंडी का कारोबार करीब 50 प्रतिशत तक सिमट गया है, जिससे इस क्षेत्र से जुड़े लगभग 70 हजार श्रमिकों की आजीविका पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं. हालांकि मार्बल एसोसिएशन और मार्बल व्यापारी इस मुद्दे पर अपनी अलग-अलग राय रखते हैं.
मार्बल एसोसिएशन अध्यक्ष ने कहा बड़ा प्रभाव नहीं
मार्बल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधीर जैन ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में मार्बल उद्योग पर किसी बड़े संकट जैसी स्थिति नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान और इराक से आने वाला कुछ विशेष क्वालिटी का माल युद्ध के चलते फिलहाल बंद हुआ है, जिससे सीमित असर पड़ा है.
जैन के अनुसार, वियतनाम, तुर्की सहित अन्य देशों से मार्बल का आयात-निर्यात सामान्य रूप से जारी है. हालांकि, जो जहाज पहले से रास्ते में हैं, उनमें माल की डिलीवरी में थोड़ी देरी हो सकती है. लेकिन यह अस्थायी स्थिति है. उन्होंने बताया कि चीन से आने वाले केमिकल्स की सप्लाई भी जारी है. पहले की तरह ही माल आ रहा है बस बड़े स्टॉक या डायरेक्ट सप्लाई में कुछ बदलाव देखने को मिल रहा है, लेकिन इससे उद्योग पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा है.
उन्होंने यह भी कहा कि मार्केट पूरी तरह से चालू है और किसी भी तरह का बड़ा व्यवधान नहीं है. कुछ सेगमेंट में हल्का असर जरूर है, लेकिन कुल मिलाकर मार्बल इंडस्ट्री सुचारू रूप से काम कर रही है.
मार्बल व्यापारी ने बताई जमीनी सच्चाई
इस मामले में जमीनी स्तर पर तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है. मार्बल व्यापारी सर्वेश्वर राठी के अनुसार, सामान्य दिनों में जहां रोजाना लगभग 500 ट्रक लोड होते थे, अब यह संख्या घटकर करीब 300 रह गई है. मंडी का दैनिक कारोबार भी पहले के लगभग 25 करोड़ रुपए से घटकर करीब 12 करोड़ रुपए पर सिमट गया है.
उन्होंने बताया कि ओमान जैसे देशों से मिले बड़े ऑर्डर और एडवांस पेमेंट तक फिलहाल होल्ड पर हैं. इसके साथ ही बिहार, बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों से घरेलू ग्राहकों की मांग भी घट गई है, जिसकी बड़ी वजह पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें हैं.
आयात ठप-केमिकल महंगे उद्योग पर दोहरी मार
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान, तुर्की और इटली समेत करीब 40 देशों से होने वाला आयात प्रभावित हुआ है, जिससे ग्रे मार्बल और ट्रेवर्टाइन जैसे पत्थरों की कमी हो गई है. वहीं प्रोसेसिंग में इस्तेमाल होने वाले एपॉक्सी के दाम बढ़कर करीब 80 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं, जिससे उत्पादन लागत में भारी इजाफा हुआ है.
मार्बल व्यापारी लक्ष्मी नारायण ने बताया कि वैश्विक युद्धों का असर अब स्थानीय स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है. ईरान से आने वाला मार्बल पूरी तरह बंद हो चुका है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और कीमतों में तेजी आई है. उन्होंने बताया कि केमिकल्स के दाम 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं, वहीं इटली से आने वाले इंपोर्टेड मार्बल के रेट में भी 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है. डीजल, पेट्रोल और गैस की बढ़ती कीमतों ने ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत को और बढ़ा दिया है.
रोजगार पर संकट के बाद सरकार से राहत की मांग
लक्ष्मी नारायण के अनुसार, बढ़ती लागत और घटते ऑर्डर के चलते वर्तमान में उद्योग में केवल 50 प्रतिशत लोडिंग ही हो पा रही है. इसका सीधा असर रोजगार पर पड़ा है. किशनगढ़ मार्बल उद्योग से करीब 300 किलोमीटर के दायरे में हजारों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है, जहां एक व्यापार के पीछे 100 से अधिक एजेंसियां काम करती हैं.
व्यापारियों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस स्थिति को गंभीरता से लिया जाए और कोरोना काल की तरह उद्योग को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.
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