राजस्थान के टांटिया यूनिवर्सिटी के नाम से बनाया जा रहा था फर्जी डिग्री, वेबसाइट बनाकर चलाया जा रहा था रैकेट

टांटिया यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से विनोद शर्मा ने पिछले साल 2025 में सदर थाना श्रीगंगानगर में मुकदमा दर्ज करवाया था. फर्जी वेबसाइट के माध्यम से न केवल जाली डिग्रियां और सर्टिफिकेट तैयार किए जा रहे हैं, बल्कि भ्रामक सामग्री का भी प्रचार किया जा रहा है.

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टांटिया यूनिवर्सिटी के नाम से फेक डिग्री

Tantia University: राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में टांटिया यूनिवर्सिटी के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाकर छात्रों से ठगी करने और जाली डिग्रियां जारी करने के बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ है. सदर थाना पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को पंजाब के मुक्तसर से गिरफ्तार किया है. आरोपी के पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन और बड़ी मात्रा में संदिग्ध डिजिटल डाटा बरामद किया गया है.

वेबसाइट्स में केवल स्पेलिंग का मामूली अंतर

पुलिस के अनुसार, आरोपी ने टांटिया यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट से मिलती-जुलती एक फर्जी वेबसाइट तैयार की थी. दोनों वेबसाइट्स में केवल स्पेलिंग का मामूली अंतर रखा गया था, जिससे छात्र आसानी से भ्रमित हो जाते थे. इसी फर्जी वेबसाइट के जरिए प्रवेश परीक्षा, एडमिट कार्ड, परीक्षा परिणाम, मार्कशीट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और डिग्रियों से जुड़ी भ्रामक जानकारी डाली जा रही थी. आरोपी ऑनलाइन वेरिफिकेशन का झांसा देकर छात्रों से फीस वसूलता था.

जाली डिग्रियां और सर्टिफिकेट किये जा रहे थे तैयार

इस पूरे मामले में टांटिया यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से विनोद शर्मा ने पिछले साल 2025 में सदर थाना श्रीगंगानगर में मुकदमा दर्ज करवाया था. शिकायत में बताया गया था कि फर्जी वेबसाइट के माध्यम से न केवल जाली डिग्रियां और सर्टिफिकेट तैयार किए जा रहे हैं, बल्कि भ्रामक सामग्री का भी प्रचार किया जा रहा है. इससे छात्रों को आर्थिक और शैक्षणिक नुकसान हो रहा है, वहीं यूनिवर्सिटी की छवि और विश्वसनीयता पर भी गंभीर असर पड़ रहा है.

अन्य विश्वविद्यालयों से संबंधित डाटा भी आरोपी के पास मौजूद

सीओ सिटी विशाल जांगिड़ आईपीएस ने बताया कि शिकायत के आधार पर तकनीकी जांच शुरू की गई, जिसके बाद आरोपी तक पहुंच बनाई गई. गिरफ्तार आरोपी की पहचान सर्वजीत सिंह उर्फ जॉनी, निवासी मुक्तसर साहिब (पंजाब) के रूप में हुई है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से इस फर्जी वेबसाइट का संचालन कर रहा था और अन्य विश्वविद्यालयों से संबंधित डाटा भी उसके पास मौजूद है.

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पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित गिरोह हो सकता है, जिसमें और भी लोग शामिल हैं. आरोपी को कोर्ट में पेश कर रिमांड लिया जाएगा, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके और ठगी से जुड़े अन्य आरोपियों तक पहुंच बनाई जा सके.

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