मिर्धा परिवार में सिर-फुटव्वल, 150 गज़ ज़मीन की लड़ाई थाने पहुंची; ज्योति मिर्धा ने दर्ज करवाई FIR

Jodhpur News: इस पूरे विवाद का केंद्र फार्म हाउस के अंदर बना 150 वर्ग गज का वह समाधि स्थल है. मनीष मिर्धा पक्ष का दावा है कि डॉ. ज्योति मिर्धा इस बेशकीमती जमीन को बेचना चाहती है, लेकिन बीच में आ रहा पैतृक समाधि स्थल सौदे में बाधा बन रहा है.

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ज्योति मिर्धा और उनके चचेरे भाई मनीष मिर्धा

Nagaur News: नागौर की राजनीति के सबसे रसूखदार मिर्धा परिवार की जोधपुर स्थित मिर्धा फार्म की 150 गज की जमीन की लड़ाई थाने पहुंच गई है. पूर्व सांसद डॉ. ज्योति मिर्धा की तरफ से चचेरे भाई मनीष मिर्धा और अन्य के खिलाफ प्रतापनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है. ज्योति मिर्धा की तरफ से उनके अधिकृत प्रतिनिधि प्रेमप्रकाश ने रिपोर्ट दी है. रिपोर्ट में सूथला स्थित फार्म हाउस पर जबरन कब्जे के प्रयास और तोड़फोड़ का आरोप लगाए गए हैं.

वहीं दूसरे पक्ष का दावा है कि यह विवाद केवल जमीन के टुकड़े का नहीं, बल्कि वहां बने पूर्वजों के समाधि स्थल को लेकर है. इसे वो बचाने का दावा कर रहे हैं. ज्योति मिर्धा का पक्ष इसे अतिक्रमण और अवैध कब्जा बता रहा है. विवाद को देखते हुए पुलिस ने समाधि स्थल पर पुलिसकर्मी को तैनात किया है.

FIR में क्या है ? 

एफआईआर के मुताबिक, मामले की शुरुआत 13 जनवरी को दोपहर करीब 12 बजे हुई. जब मनीष मिर्धा अपने 10-12 साथियों के साथ जबरन फार्म हाउस में घुस आए. आरोप है कि उन्होंने वहां मौजूद केयरटेकर सलीम को डरा-धमकाकर तालों की चाबियां छीन लीं.

इसके अगले दिन यानी 14 जनवरी को आरोपी पक्ष ने दोबारा ताले तोड़े और वहां बने समाधि स्थल के साथ छेड़छाड़ व तोड़फोड़ शुरू कर दी. परिवादी प्रेमप्रकाश ने पुलिस को बताया कि मनीष और उनके साथी वीडियो में स्पष्ट रूप से तोड़फोड़ करते हुए दिखाई दे रहे हैं.

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मनीष मिर्धा के खिलाफ मामला दर्ज 

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है. प्रतापनगर पुलिस ने परिवादी प्रेम प्रकाश की रिपोर्ट के आधार पर भारतीय न्याय संहिता के तहत मनीष मिर्धा के खिलाफ संपत्ति में अनधिकृत प्रवेश करने, चोट पहुंचाने की तैयारी के साथ जबरन घर में घुसने और गैर-कानूनी जमावड़ा कर हमला करने की धाराओं में केस दर्ज किया है. पुलिस ने मौके के वीडियो फुटेज भी साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित किए हैं. मामले की जांच थानाधिकारी भवानी सिंह कर रहे हैं.

विवाद का मुख्य कारण समाधि स्थल बताया जा रहा 

दरअसल इस पूरे विवाद का केंद्र फार्म हाउस के अंदर बना 150 वर्ग गज का वह समाधि स्थल है. मनीष मिर्धा पक्ष का दावा है कि डॉ. ज्योति मिर्धा इस बेशकीमती जमीन को बेचना चाहती है, लेकिन बीच में आ रहा पैतृक समाधि स्थल सौदे में बाधा बन रहा है. मनीष का आरोप है कि ज्योति मिर्धा इस समाधि स्थल को हटाना चाहती हैं, जबकि वे अपने पूर्वजों की निशानी को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

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यहां पर सबसे पहले 1982 में नाथूराम मिर्धा की मां की समाधि बनाई गई थी. 1987 में मनीष के बड़े भाई रवि की समाधि बनी. नाथूराम मिर्धा के निधन के बाद 1996 में उनकी भी यही समाधि बनी. अब मनीष अपने पिता भानु प्रकाश मिर्धा की समाधि स्थल यहीं बना रहे हैं, जिसका विरोध किया जा रहा है. शिकायत पक्ष का कहना है कि मनीष ने गुंडा तत्वों के साथ मिलकर मालिकाना हक वाली जमीन हड़पने की नीयत से यह हमला किया है.

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