Rajasthan News: राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने महिलाओं की ताकत पर खुलकर बात की. उन्होंने पुरुषों पर व्यंग्य करते हुए कहा कि जब पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था तो पुरुषों को बड़ी आपत्ति हुई.
वे कहते थे कि महिलाएं घूंघट से बाहर निकल भी पाएंगी या नहीं. लेकिन राजे ने बताया कि इस फैसले के बाद गांव की महिलाएं न सिर्फ घूंघट से बाहर आईं बल्कि जिला प्रमुख, प्रधान और सरपंच जैसे महत्वपूर्ण पदों को शानदार तरीके से संभाला. उन्होंने कहा कि महिलाओं ने साबित कर दिया कि वे किसी से कम नहीं हैं.
'राजनीति में महिलाओं को पूरा प्रतिनिधित्व नहीं'
यह बातें राजे ने श्री बांगड़ महिला महाविद्यालय के वार्षिक उत्सव में कही. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े मौजूद थे. राजे ने देश की प्रगति पर रोशनी डाली और बताया कि आजादी के वक्त महिलाओं की साक्षरता दर सिर्फ 9 प्रतिशत थी जो अब बढ़कर 70 प्रतिशत हो गई है. फिर भी राजनीति में महिलाओं को पूरा प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाकर महिलाओं को मजबूत बनाने का कदम उठाया. राजे ने जोर दिया कि महिलाओं के हक की रक्षा महिलाओं को खुद करनी होगी. महिलाओं के लिए महिलाओं द्वारा यह काम होना चाहिए ताकि वे पुरुषों के बराबर खड़ी हो सकें.
'साहस से कुछ भी हासिल कर सकते हैं'
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रेरणा देते हुए कहा कि अगर प्रतिभा पाटील और द्रौपदी मुर्मू देश के सबसे ऊंचे पद राष्ट्रपति तक पहुंच सकती हैं तो डीडवाना-कुचामन की बेटियां क्यों नहीं. उन्होंने युवा लड़कियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि शिक्षा और साहस से कुछ भी हासिल किया जा सकता है. कार्यक्रम में पूर्व मंत्री और स्थानीय विधायक यूनुस खान और राजपाल शेखावत भी शामिल हुए.
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