Ground Report: वागड़ प्रयाग बेणेश्वर धाम टापू में तब्दील, 10 दिनों से फंसे लोग; श्रद्धालु भी नहीं कर पा रहे दर्शन

बेणेश्वर धाम का टापू में तब्दील होना वागड़ क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है. श्रद्धालुओं की आस्था के इस केंद्र तक पहुंच बाधित होने से न केवल धार्मिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं, बल्कि यहां रह रहे परिवार भी हर वर्ष गंभीर संकट में आ जाते हैं.

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Rajasthan News: आदिवासी अंचल का 'महाकुंभ' कहे जाने वाला बेणेश्वर धाम (Beneshwar Dham Dungarpur) इन दिनों पानी से घिरकर टापू बन चुका है. सोम, माही और जाखम नदियों के संगम पर स्थित यह धाम, माही डेम (Mahi Dam) के गेट खोलने के बाद बढ़े जलस्तर से पूरी तरह बाकी इलाके से कट गया है. पिछले 10 दिनों से बेणेश्वर धाम का संपर्क टूटा हुआ है और मंदिर परिसर में पुजारी व सेवक परिवार सहित करीब 50 लोग फंसे हुए हैं.

हर साल दोहराई जाती है समस्या

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह स्थिति लगभग हर वर्ष बनती है. आवागमन सुचारू रखने के लिए पुल निर्माण का काम पूर्व सरकार के समय शुरू हुआ था, लेकिन तय समय सीमा गुजरने के बाद भी कार्य पूरा नहीं हो सका. यही कारण है कि बारिश और डेम से छोड़े गए पानी के समय धाम टापू में तब्दील हो जाता है.

फंसे हुए परिवार और दिक्कतें

मंदिर में कार्यरत पुजारी और सेवक परिवारों के लिए प्रशासन द्वारा पहले से ही भोजन व दवाइयों की व्यवस्था की जाती है, लेकिन लगातार कई दिनों तक पानी नहीं उतरने से उनकी परेशानियां बढ़ जाती हैं. बीमार होने पर इलाज तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है.

श्रद्धालु भी नहीं कर पा रहे दर्शन
Photo Credit: NDTV Reporter

जलीय जीवों से भी खतरा

डेम से छोड़े गए पानी के बहाव में कई जलीय जीव भी आ जाते हैं. हाल ही में पुल पर एक मगरमच्छ दिखाई देने की घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है. इस कारण तैराकी कर टापू तक पहुंचना भी जोखिम भरा हो जाता है.

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श्रद्धालु नहीं कर पा रहे दर्शन

बेणेश्वर धाम वागड़ के आदिवासी अंचल की आस्था का केंद्र है. त्रिवेणी संगम और मावजी महाराज के कारण यहां लाखों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. दूर-दराज से लोग दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन इन दिनों धाम तक पहुंच संभव नहीं है. हाल ही में जयपुर से आए श्रद्धालुओं का एक समूह बिना दर्शन किए ही लौटना पड़ा.

प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम

टापू बनने के बाद सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस प्रशासन ने विशेष प्रबंध किए हैं. धाम तक जाने वाले साबला और गनोड़ा मार्ग पर पुलिस बैरिकेडिंग कर दी गई है ताकि कोई भी वाहन पानी से भरे पुल को पार करने की कोशिश न करे. वहीं, टापू पर फंसे परिवारों के लिए आवश्यक दवाइयां और राशन की आपूर्ति पहले ही कर दी गई है.

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