Rajasthan News: राजस्थान के हाड़ौती इलाके में बाघों की दुनिया फिर से रौनक पकड़ रही है. एक सदी पहले खत्म हुआ पुराना टाइगर कॉरिडोर अब नए सिरे से जीवंत होने वाला है. रणथंभौर से मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघ टी-2408 को सफलतापूर्वक लाया गया है. इस कदम से मुकुंदरा और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व बाघ संरक्षण का बड़ा केंद्र बनेंगे.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस सफलता पर कोटा समेत पूरे हाड़ौती के लोगों और वन्यजीव प्रेमियों को बधाई दी. उन्होंने इसे जैव विविधता बचाने पर्यावरण का संतुलन रखने और जंगली जानवरों की रक्षा करने का अहम कदम बताया.
मुकुंदरा-रामगढ़ बनेंगे बाघों का मजबूत घर
ओम बिरला ने कहा कि मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी में मिलकर किए जा रहे प्रयास कोटा-बूंदी इलाके को बाघों की रक्षा का मुख्य केंद्र बना देंगे. यहां बाघों की तादाद बढ़ने से पर्यावरण पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा. इससे स्थानीय युवाओं को नौकरी और कमाई के नए रास्ते खुलेंगे.
वनों की सुरक्षा पर्यटन और लोगों की भागीदारी का यह मेल हाड़ौती को प्रकृति और विकास के बीच संतुलन का शानदार मिसाल बनाएगा. वन विभाग ने रामगढ़ में पेंच टाइगर रिजर्व से बाघ लाने के बाद अब रणथंभौर से यह कदम उठाया है जो बाघों की नस्ल को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा. रामगढ़ विषधारी से मुकुंदरा तक का ऊपरी हिस्सा बाघों के लिए सुरक्षित जगह बनेगा.
बाघों की संख्या में तेज उछाल
मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के डीसीएफ मुथु सोमसुंदरम ने बताया कि लाया गया बाघ टी-2408 करीब चार साल का है. इसके आने से यहां नर बाघों की गिनती दो हो गई है. अब रिजर्व में कुल छह बाघ हैं जिनमें दो नर तीन मादा और एक बच्चा शामिल है. खास बात यह है कि पिछले एक साल में बाघों की संख्या दो से बढ़कर छह हो गई.
दिसंबर 2024 तक यहां सिर्फ एक बाघ और एक बाघिन ही थे. यह बदलाव हाड़ौती के जंगलों को बाघों से भरा हुआ बनाने की दिशा में बड़ा संकेत है. अब पर्यटक यहां बाघों की दहाड़ सुनकर रोमांच महसूस करेंगे और इलाका वन्यजीवों का स्वर्ग बन जाएगा.
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