Holashtak 2026: कांकरोली द्वारकाधीश मंदिर में होलाष्टक के साथ 'राल महोत्सव' शुरू, जहां आयुर्वेदिक मिश्रण से होता है कफ का अंत!

Holashtak Kankroli Dwarkadhish Temple: क्या आप जानते हैं कि होली का धुआं भी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है? द्वारकाधीश मंदिर के राल महोत्सव में पांच आयुर्वेदिक पदार्थों के मिश्रण से निकलने वाला धुआं कफ का नाश करता है. पढ़ें इस रोमांचक खेल और इसके शारीरिक लाभ.

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आयुर्वेदिक चीजों का मिश्रण फेंकते हुए
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 Dwarkadhish Temple Kankroli Ral Mahotsav: राजसमंद के कांकरोली में स्थित तृतीय पीठ प्रन्यास के द्वारकाधीश मंदिर में होली के दिनों में होलाष्टक ( Holashtak 2026) का खास उत्सव होता है. होली से 8 दिन पहले होलाष्टक मनाया जाता है. लेकिन द्वारकाधीश मंदिर( Dwarkadhish Temple) में आज (25 फरवरी) से होलाष्टक मनाया जा रहा है जो होली से 40 दिन पहले तक चलेगा. वैसे तो सनातन धर्म में होलाष्टक 8 दिन का होता है, लेकिन पुष्टिमार्ग(pushtimarg) में होलाष्टक 40 दिन का होता है.

होलाष्टक की पौराणिक कथा और महत्व

कहा जाता है कि होलाष्टक के दौरान हिरण्यकश्यप नाम के राक्षस ने अपने बेटे भक्त प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति के लिए 8 दिनों तक काफी यातनाएं दी थी. लेकिन उसकी भक्ति के दम पर 9वें दिन प्रह्लाद के पिता राक्षस हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की गोद में रखकर उसे जलाने की कोशिश की थी. लेकिन ठाकुर जी की कृपा और भक्ति के कारण वह सुरक्षित रहा और होलिका जलकर राख हो गई. तब से इन दिनों को होलाष्टक के रूप में मनाया जाता है.

द्वारकाधीश राल महोत्सव, आयुर्वेदिक धुएं से  मिलता है सेहत का लाभ

इस उत्सव के पहले दिन द्वारकाधीश मंदिर में राल महोत्सव का आयोजन किया जाता है. जिसमें ब्रज भाषा में रसिया गाया जाता है. इसमें ठाकुर जी को होली के साथ होली के रंग खिलाकर खुश किया जाता है.साथ ही जिले में बने गोवर्धन पूजा चौक में दो बड़े मसाले जलाए जाते हैं और उन पर पांच आयुर्वेदिक चीजों का मिश्रण फेंका जाता है. जिससे आग और धुएं के बड़े-बड़े बादल उठते हैं. माना जाता है कि इससे निकला यह धुआं सांस के साथ जब शरीर में प्रवेश करता है तो कफ की परेशानी को खत्म करता है. इस रोमांचक खेल और शारीरिक फायदों से अभिभूत होकर देश भर से बड़ी संख्या में भक्त यहां राल महोत्सव  मनाने पहुंचते हैं.

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