Udaipur News: इंटरनेट के इस दौर में साइबर अपराधी अक्सर महिलाओं और मासूम लोगों के निजी फोटो-वीडियो (NCI) लीक करने की धमकी देकर उन्हें प्रताड़ित करते हैं. कई बार हालात इतने बुरे हो जाते हैं कि पीड़ित आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं. लेकिन अब डरने की जरूरत नहीं है. केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने ब्लैकमेलरों के मंसूबों पर पानी फेरने के लिए StopNCII.org नाम का एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है. यह टूल आपकी तस्वीरों को वायरल होने से पहले ही रोकने की ताकत रखता है.
आपकी फोटो रहेगी 100% सुरक्षित
उदयपुर के साइबर एक्सपर्ट श्याम चंदेल ने बताया कि यह पोर्टल एक एडवांस तकनीक पर काम करता है जिसे 'हेशिंग' (Hashing) कहते हैं. यह तकनीक आपकी फोटो या वीडियो को एक डिजिटल कोड (फिंगरप्रिंट) में बदल देती है. सबसे खास बात यह है कि आपकी असली फोटो कभी भी वेबसाइट पर अपलोड नहीं होती. सिस्टम सिर्फ उस डिजिटल कोड को पहचानता है, जिससे आपकी प्राइवेसी पूरी तरह सुरक्षित रहती है.
ऐसे काम करता है यह टूल
अगर आपको डर है कि कोई आपकी निजी तस्वीरें फेसबुक, इंस्टाग्राम या किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर डाल सकता है, तो यह प्रोसेस अपनाएं.
- पीड़ित व्यक्ति इस पोर्टल पर जाकर उन तस्वीरों का डिजिटल फिंगरप्रिंट बना सकता है.
- अगर आपके पास वायरल होने वाली फोटो नहीं है, तो 'फेस रिकॉग्निशन' के लिए अपनी सामान्य फोटो का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
- यह डिजिटल फिंगरप्रिंट फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ शेयर किया जाता है.
- इसके बाद, अगर कोई भी व्यक्ति उन तस्वीरों को अपलोड करने की कोशिश करेगा, तो सिस्टम उन्हें तुरंत पहचान लेगा और अपलोड होने से पहले ही ब्लॉक कर देगा.
कैसे करें इस टूल का इस्तेमाल?
- सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट StopNCII.org पर जाएं.
- यहां अपना 'केस क्रिएट' (Create Your Case) करें.
- अपने ही डिवाइस से उस ओरिजिनल फोटो या वीडियो को सेलेक्ट करें जिसे आप सुरक्षित करना चाहते हैं.
- वेबसाइट उस कंटेंट का एक यूनिक डिजिटल कोड जनरेट करेगी.
- यह कोड दुनिया भर के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के साथ साझा किया जाएगा.
- अगर वह फोटो पहले से कहीं पोस्ट है, तो प्लेटफॉर्म उसे पहचानकर खुद हटा देगा और भविष्य में भी उसे कोई दोबारा पोस्ट नहीं कर पाएगा.
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