बाड़मेर के खड़ीन गांव की बेटी और चवा की बहू मंजू जांगिड़ का चयन संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत अफ्रीकी देश कांगो में तैनाती के लिए हुआ है. वह सीमा सुरक्षा बल की 160 सदस्यीय 19वीं टुकड़ी के साथ रवाना हुई हैं, जिसमें शामिल 24 महिला प्रहरियों में मंजू भी शामिल हैं. मंजू जांगिड़ संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में सेवाएं देने वाली बाड़मेर की पहली महिला BSF कांस्टेबल बनकर इतिहास रच चुकी हैं.
गृहस्थी और देश सेवा में किया साबित
रेगिस्तान की इस जांबाज बेटी ने गृहस्थी और देश सेवा, दोनों मोर्चों पर खुद को बेहतरीन तरीके से साबित किया है. एक ओर जहां वह अपने परिवार में बेटी, बहू और मां के दायित्वों को पूरी शिद्दत से निभा रही हैं, वहीं दूसरी ओर अब वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और मानवता की रक्षा के लिए मुस्तैद दिखेंगी. उनका यह सफर यह साबित करता है कि यदि हौसले बुलंद हों और इरादे मजबूत हों, तो कोई भी सीमा राह में रोड़ा नहीं बन सकती.
बहुत ही साधारण परिवार से आती हैं मंजू जांगिड़
मंजू जांगिड़ की यह सफलता इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि वह एक बहुत ही साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर इस मुकाम तक पहुंची हैं. उनके पिता मोहन सिंह सुथार शिक्षा विभाग से रिटायर्ड हैं, जिन्होंने अपनी बेटी को हमेशा आगे बढ़ने की हौसला अफजाई की.
मंजू के पति कारपेंटर
मंजू के पति ईश्वरलाल सुथार चवा गांव में कारपेंटर का कार्य करते हैं, उन्होंने मंजू के इस सपने को पूरा करने में उनका पूरा सहयोग किया. एक छोटे से ग्रामीण परिवेश से निकलकर संयुक्त राष्ट्र की प्रतिष्ठित सेना का हिस्सा बनना क्षेत्र की हर उस बेटी के लिए बड़ी प्रेरणा है, जो जीवन में कुछ अलग करने का सपना देखती है.
मंजू जांगिड़ के गांव खड़ीन और ससुराल चवा सहित पूरे बाड़मेर जिले के ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने बधाई दी. ग्रामीणों का कहना है कि मंजू ने न केवल अपने परिवार और समाज, बल्कि पूरे सीमावर्ती क्षेत्र का सिर अंतरराष्ट्रीय पटल पर गर्व से ऊंचा कर दिया है.
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