Rajasthan News: भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) जब गुरुवार को राजस्थान के चूरू जिले के सादुलपुर (Sadulpur) में सांसद राहुल कस्वां (Rahul Kaswan) के आवास पर पहुंचे, तो सबकी नजरें उन पर टिक गईं. इस दौरान उन्होंने अपने इस्तीफे को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर पहली बार खुलकर बात की. धनखड़ ने दो टूक कहा कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा था कि वे 'बीमार' हैं.
उनके मुताबिक, इस्तीफा देना स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न बरतने का एक सचेत फैसला था. उन्होंने एक बहुत गहरी बात कही- 'इस्तीफा देते समय मैंने यह नहीं कहा कि मैं बीमार हूं, बल्कि यह कहा कि मैं अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रहा हूं.' यह संदेश उन सभी के लिए था जो काम की भागदौड़ में अपनी सेहत को पीछे छोड़ देते हैं.
'डॉक्टरों की सलाह पर दिया था इस्तीफा'
अपने त्याग पत्र की यादों को ताजा करते हुए धनखड़ ने बताया कि उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 67(a) के तहत अपना पद छोड़ा था. यह फैसला पूरी तरह से डॉक्टरों की सलाह और खुद के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए लिया गया था. उन्होंने स्पष्ट किया कि उपराष्ट्रपति के रूप में देश की सेवा करना उनके लिए गौरव की बात थी, लेकिन एक मोड़ पर आकर शरीर और स्वास्थ्य को समय देना भी उतना ही संवैधानिक और नैतिक रूप से जरूरी था. उन्होंने अपनी चिट्ठी में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और पूरी मंत्रिपरिषद के सहयोग के प्रति जो आभार जताया था, उसकी गर्माहट आज भी उनके शब्दों में महसूस की गई.
'कर्ज चुकाने सादुलपुर की मिट्टी पर आया हूं'
धनखड़ की यह यात्रा भले ही निजी थी, लेकिन इसके मायने बहुत बड़े थे. पूर्व सांसद रामसिंह कस्वां का हालचाल जानने पहुंचे धनखड़ काफी भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि उनके और कस्वां परिवार के बीच का रिश्ता राजनीति से बहुत ऊपर है. उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि जब भी उनके (धनखड़ के) स्वास्थ्य का मुद्दा सामने आया, रामसिंह कस्वां हमेशा उनकी चिंता करने वालों में सबसे आगे रहे. इसी स्नेह और सम्मान को धनखड़ ने अपने ऊपर एक 'कर्ज' बताया, जिसे चुकाने के लिए वे आज सादुलपुर की मिट्टी पर पहुंचे थे.
'स्नेह और विश्वास मेरे लिए सबसे बड़ी पूंजी'
मुलाकात के दौरान पूर्व विधायक कृष्णा पूनिया ने भी उनसे भेंट की. धनखड़ ने बातचीत में इस बात पर गर्व जताया कि उन्होंने भारत को आर्थिक प्रगति और विकास के पथ पर बढ़ते हुए बहुत करीब से देखा है. उन्होंने कहा कि सांसदों से जो स्नेह और विश्वास उन्हें मिला, वही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है.
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