Rajasthan News: राजस्थान की राजधानी जयपुर में बुधवार शाम एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे सिस्टम और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. महेश नगर इलाके में सस्पेंड चल रहे एक लेक्चरर मनोहर भादू ने चलती ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली. लेकिन मरने से पहले उन्होंने जो 4 पन्नों का सुसाइड नोट लिखा, उसने महकमे में हड़कंप मचा दिया. मनोहर ने अपनी मौत का जिम्मेदार सीधे तौर पर पुलिस और एसओजी (SOG) के अधिकारियों को ठहराते हुए लिखा- 'मैं मरा नहीं हूं, पुलिस नाम की चीज ने मेरी इरादतन हत्या कर डाली है.'
रेलवे ट्रैक पर 3 घंटे पड़ा रहा शव, ऊपर से गुजरीं 3 ट्रेनें
यह मंजर रूह कंपा देने वाला था. चश्मदीदों के मुताबिक, मनोहर का शव करीब तीन घंटे तक रेलवे ट्रैक पर पड़ा रहा. संवेदनहीनता की हद तो तब हो गई जब शव के ऊपर से एक के बाद एक तीन ट्रेनें गुजर गईं, लेकिन कोई भी आगे नहीं आया. अंत में एक व्यक्ति ने साहस दिखाकर शव को पटरी से अलग किया. सूचना पर पहुंची महेश नगर थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर एसएमएस अस्पताल (SMS Hospital) की मोर्चरी में रखवाया.
SOG के 'जोशीले तेवर' और 20 हजार की उधारी का दर्द
मूल रूप से सांचौर (खारा) के रहने वाले मनोहर भादू ने अपने सुसाइड नोट में एसओजी के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने लिखा कि एसओजी के जोशीले तेवर ने उन्हें उस भट्टी में डाल दिया जहां रोज नए खुलासे हो रहे थे. मनोहर ने स्वीकार किया कि 2022 से पहले उनसे कुछ गलतियां हुई थीं, लेकिन अब वह नया जीवन शुरू कर चुके थे. उन्होंने भावुक होकर लिखा कि वह पिछले 4 साल से दोस्तों से 5000 से 20,000 रुपये की मदद लेकर घर चला रहे थे.
'मुकेश सोनी और श्यामसुंदर बिश्नोई ने फंसाया'
सुसाइड नोट में मनोहर ने पुलिस के 'मल्टी-एंगल' खेल का पर्दाफाश किया. उन्होंने आरोप लगाया कि अजमेर SOG की जिस FIR में मुख्य आरोपी रमेश कुमार (हिंदी ग्रेड-2) था, उसमें मनोहर का नाम कहीं नहीं था. मनोहर के मुताबिक, तत्कालीन जांच अधिकारी मुकेश सोनी ने गिरफ्तार आरोपियों से उनके बारे में पूछताछ की ताकि उनसे रुपये ऐंठे जा सकें. मुकेश सोनी ने वर्तमान जांच अधिकारी श्यामसुंदर बिश्नोई को कथित तौर पर वॉट्सऐप कॉल कर कहा- 'मनोहर के अलावा किसी का नाम मत डालना, उसे 4 मामलों में घसीट सकते हो और डरा-धमका कर कुछ भी करवा सकते हो.'
'मां तू चिंता मत करना, न्याय जरूर मिलेगा'
सुसाइड नोट का सबसे भावुक हिस्सा उनके परिवार के लिए था. मनोहर अपने घर के 20 सदस्यों में अकेले थे जो सबको साथ लेकर चलते थे. उन्होंने लिखा, 'आप मेरे घर जाकर मेरे पांचों लाडले बच्चों (3 अपने और 2 भाई के), मां-बाप, पत्नी और भाई-बहनों की हालत देख लेना.' उन्होंने सरकार से मांग की कि उनकी व्याख्याता (Lecturer) पोस्ट पर किसी को अनुकम्पा नियुक्ति मिले ताकि 70-80 साल के बूढ़े मां-बाप का सहारा बना रहे. उन्होंने अपने भाई रमेश को भी संदेश दिया कि परिवार के साथ मिलजुल कर रहना.
'बार-बार इनके हाथों मरने से अच्छा है एक बार खत्म हो जाना'
मनोहर ने लिखा कि वह कमजोर नहीं थे, लेकिन गलत आरोपों और महंगाई के इस दौर में कोर्ट-कचहरी के खर्चों ने उन्हें तोड़ दिया. उन्होंने लिखा कि हर 10-20 दिन में एक नई तारीख पड़ती थी, जिससे वह विकट आर्थिक संकट में फंस गए थे. उन्होंने दावा किया कि जेल में ऐसे 3-4 लोग और भी हैं जिनकी 1% भी गलती नहीं है, लेकिन वे सिस्टम का शिकार हो रहे हैं. अंत में उन्होंने लिखा, 'मेरी क्षमता छीन ली गई है, वरना इतना बड़ा पाप (आत्महत्या) करने जा रहा हूं, यह शर्म की बात है.
SOG अधिकारियों ने नहीं उठाया फोन
इस मामले पर SOG का पक्ष जानने के लिए जब NDTV संवाददाता ने अधिकारियों से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन नहीं उठाया. लेकिन आरोपों की जांच SOG भी कर रही है. बात होने पर उनका पक्ष खबर में ऐड किया जाएगा.
सुसाइड नोट के दावों की जांच कर रही पुलिस
वहीं, महेश नगर थानाधिकारी सुरेश यादव ने बताया कि परिजनों को सूचना दे दी है. परिजन गांव से जयपुर पहुंच रहे हैं. SMS मुर्दाघर में मृतक का शव रखवाया गया है. परिजन के आने के बाद पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सुपुर्द किया जाएगा. सुसाइड नोट में किए गए दावों के आधार पर फिलहाल टीम जांच कर रही है.
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