राजस्थान के इस इलाके में 'लाल सोना' से बदली किसानों की किस्मत, 10 गुना बढ़ी कमाई

केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान, जोधपुर ने भगवा अनार की नई प्रजाति विकसित की है जो किसानों के लिए आय का नया स्रोत बनी है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर
meta image

खेती के काम में किसानों को अक्सर मुश्किलें आती हैं. यह एक आम धारणा बन चुकी है कि खेती फायदे का पेशा नहीं रहा. लेकिन, किसानों की मदद के लिए विज्ञान आगे आ रहा है जिससे उनकी किस्मत चमक रही है. ऐसा ही एक प्रयास पश्चिमी राजस्थान में हुआ है जहां वैज्ञानिकों ने अनार की ऐसी किस्मों का विकास किया है जिनसे किसानों की भरपूर आमदनी हो रही है. यह प्रयास जोधपुर स्थित केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) में किया गया है जो किसानों की आमदनी बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है. काजरी की पहल पश्चिमी राजस्थान के कृषक समुदाय के लिए बड़ी उम्मीद लेकर आई है.

संस्थान द्वारा हाल ही में विकसित की गई भगवा वेरायटी और सुपर भगवा अनार की प्रजाति किसानों के लिए आय का नया स्रोत बनी है. इन प्रजातियों को उगाने के लिए संस्थान की ओर से विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम और आयोजन किए जा रहे हैं, जिनमें किसानों को अनार की उन्नत खेती तकनीकों से परिचित कराया जा रहा है.

Advertisement

भगवा अनार से कई गुना बढ़ी आमदनी

काजरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ओम प्रकाश मीणा ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि एक विशेष प्रोजेक्ट के तहत अनार पर शोध 2010 से जारी है.

उन्होंने बताया कि पश्चिमी राजस्थान में अनार की खेती लगातार विस्तार कर रही है और इससे किसानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना ज्यादा लाभ मिल रहा है. कई स्थानों पर किसानों की आमदनी दोगुनी नहीं, बल्कि दस गुना तक बढ़ी है.

भगवा अनार की नई किस्में हाल ही में विकसित की गई हैं
Photo Credit: IANS

रेडिएशन तकनीक से विकसित भगवा अनार

उन्होंने बताया कि विशेष रूप से वे क्षेत्र जहां पानी खारा होता है, वहां अनार की पैदावार बेहद अच्छी होती है. भगवा और सुपर भगवा जैसी किस्मों को रेडिएशन तकनीक से विकसित किया गया है, जबकि प्लांटिंग मटेरियल के रूप में टिश्यू कल्चर आधारित पौधों की मांग तेजी से बढ़ी है.

डॉ. मीणा ने कहा कि अनार को 'लाल सोना' कहा जाता है, क्योंकि कम इनपुट लागत में उच्च गुणवत्ता की पैदावार लेकर यह किसानों की आमदनी का मजबूत स्रोत बन चुका है. 

Advertisement

उन्होंने कहा कि सरकारी संस्था होने के नाते काजरी का लक्ष्य रहता है कि किसानों की लागत कम हो और उत्पादन गुणवत्ता बेहतर मिले. इसी उद्देश्य से किसानों को खेती में की जाने वाली गलतियों से बचने के लिए मार्गदर्शन दिया जाता है. विशेषज्ञ उन्हें वाटर मैनेजमेंट, न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट और अन्य कृषि प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से बताते हैं, ताकि किसान इन सभी तकनीकों को अपनाकर अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें.

काजरी की इन पहलों ने पश्चिमी राजस्थान में अनार की खेती को नई पहचान दी है और किसानों के लिए आर्थिक सशक्तीकरण के नए रास्ते खोल दिए हैं.

Advertisement

ये भी पढ़ें-: Rajasthan: 647 करोड़ की परियोजना से बदलेगा राजस्थान का सिंचाई सिस्टम, CM भजनलाल आज श्रीगंगानगर में करेंगे शिलान्यास