Dausa News: राजस्थान के दौसा जिले के बांदीकुई में 6 साल पुराने प्रिंस उर्फ टिल्लू लापता कांड ने अब एक ऐसा मोड़ ले लिया है, जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा फट जाए. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के किनारे चल रही खुदाई के बीच एक बेबस पिता की आवाज पूरे इलाके में गूंज रही है. जिस बेटे को 6 साल पहले आंगन से गायब किया गया, आज उसकी तलाश जमीन के भीतर गहराइयों में की जा रही है.
9 मीटर नीचे 'संदिग्ध' संकेत, 15 फीट का खुदाई पूरी
इस उलझे हुए केस को सुलझाने के लिए दिल्ली से विशेष GPR (ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार) मशीन मंगवाई गई थी. इस मशीन ने जमीन के करीब 9 मीटर (लगभग 30 फीट) नीचे कुछ संदिग्ध संकेत दिए हैं, जिससे पुलिस की उम्मीदें जाग गई हैं. इन संकेतों के आधार पर दो जेसीबी मशीनों ने अब तक 15 फीट तक खुदाई कर डाली है. पिछले 3 दिनों में थोड़ा-थोड़ा समय मिलाकर कुल 24 घंटे तक जेसीबी मशीनें चली हैं, लेकिन अफसोस कि इतनी मशक्कत के बाद भी पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं.
'जिस हाल में भी मिले, मुझे खुशी होगी'
बेटे की तलाश की खबर मिलते ही प्रिंस के पिता जगमोहन बैरवा 21 फरवरी को दुबई से भारत लौट आए. एक्सप्रेसवे की मिट्टी को हटते देख जगमोहन का धैर्य जवाब दे रहा है, लेकिन न्याय की उम्मीद अब भी जिंदा है. NDTV राजस्थान से एक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होंने रुंधे गले से कहा, 'मेरा बेटा जिस भी कंडीशन में मिलेगा, मुझे खुशी होगी. मुझे पुलिस और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है कि अब मेरे साथ न्याय होगा.' एक पिता की यह बेबसी वहां मौजूद हर अधिकारी और ग्रामीण की आंखें नम कर रही है.
रंजिश के चलते पडोसी ने ही की थी हत्या
6 साल तक इस राज को अपने सीने में दबाकर रखने वाले पड़ोसी ने आखिरकार अपना जुर्म कबूल कर लिया है. उसने बताया कि रंजिश के चलते उसने मासूम प्रिंस की हत्या कर उसे निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे के पास दफना दिया था. लेकिन चुनौती यह है कि 6 सालों में एक्सप्रेसवे का भूगोल बदल चुका है, जिससे आरोपी सटीक जगह नहीं बता पा रहा है. यही वजह है कि पुलिस को व्यापक स्तर पर खुदाई अभियान चलाना पड़ रहा है.
6 साल का इंतजार, हाई कोर्ट ने की सख्ती
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब परिवार ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की. 7 जांच अधिकारियों के बदलने के बाद भी जब कुछ नहीं मिला, तो कोर्ट की सख्ती ने जांच की दिशा बदल दी. अब वैज्ञानिक साक्ष्यों और दिल्ली से आई मशीन के संकेतों के भरोसे पुलिस की टीम मौके पर डटी हुई है. लंबा समय बीत जाने के बावजूद, जगमोहन और उनके परिवार को आज भी उस इंसाफ की आस है जो मिट्टी के नीचे कहीं दबा हुआ है.
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