Jagdeep Dhankhar: हाल ही में उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देने वाले जगदीप धनखड़ ने राजस्थान विधानसभा में पूर्व विधायक के रूप में मिलने वाली पेंशन के लिए आवेदन किया है. वह राजस्थान की किशनगढ़ विधानसभा सीट से कांग्रेस पार्टी से 1993 से 1998 तक विधायक रहे. उनको पूर्व विधायक के तौर पर जुलाई 2019 तक पेंशन मिली, लेकिन पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनने के बाद पूर्व विधायक के रूप में मिलने वाली पेंशन बंद हो गई थी.
अगस्त 2022 में बने थे उपराष्ट्रपति
जगदीप धनखड़ एनडीए के उम्मीदवार के तौर पर 11 अगस्त 2022 को हुए चुनाव में जीत दर्ज करके उपराष्ट्रपति बने थे. इसके बाद वह करीब 3 साल उपराष्ट्रपति के पद पर रहे और बीते 21 जुलाई को जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति से इस्तीफा दे दिया. उपराष्ट्रपति के पद से उनके इस्तीफा देते ही जमकर बवाल हुआ है. विपक्ष ने धनखड़ के इस्तीफे के मुद्दे पर सरकार को जमकर घेरा.
जनता दल से राजनीतिक जीवन की शुरुआत
झुंझुनूं जिले के किठाना गांव में पैदा हुए जगदीप धनखड़ ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जनता दल से की और 1989 में झुंझुनूं से सांसद बने. वह चंद्रशेखर सरकार में मंत्री भी रहे. इसके बाद वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और 1991 में लोकसभा चुनाव लड़ा, हालांकि वह चुनाव हार गए. बाद में 1993 के विधानसभा चुनाव में फिर से कांग्रेस के टिकट पर किस्मत आजमाई और विधायक बने. जगदीप धनखड़ अजमेर जिले के किशनगढ़ विधानसभा सीट से 1993 से 1998 तक कांग्रेस के विधायक रहे.
राजस्थान विधानसभा सचिवालय में पेंशन के लिए आवेदन
बाद में राज्यपाल बनने के बाद उनको पेंशन मिलना बंद हो गई. अब उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफे के बाद जगदीप धनखड़ ने फिर से राजस्थान विधानसभा सचिवालय में नए सिरे से पूर्व विधायक के तौर पर पेंशन के लिए आवेदन किया है. जानकारी के अनुसार, विधानसभा सचिवालय ने उनके आवेदन पर प्रक्रिया शुरू कर दी है और उनकी पेंशन उपराष्ट्रपति के रूप में उनके इस्तीफे की तारीख से लागू होगी.
धनखड़ की पूर्व विधायक के तौर पर कितनी पेंशन?
राजस्थान विधानसभा में किसी भी विधायक को सदस्य रहते वेतन और उसके कार्यकाल पूरा होने के बाद पेंशन देने के प्रावधान हैं. विधायक को एक कार्यकाल के लिए 35 हजार रुपए की पेंशन मिलती है. हालांकि, अगर कोई जनप्रतिनिधि एक से ज्यादा बार विधायक रहा है, तो पहले कार्यकाल की 35 हजार पेंशन के साथ बाकी अन्य कार्यकाल की पेंशन 20 प्रतिशत ही मिलती है.
पेंशन के प्रावधान के अनुसार, पूर्व विधायक की उम्र 70 वर्ष से अधिक होने पर पेंशन में 20 फ़ीसदी और 80 से ज्यादा उम्र होने पर 30 फीसदी का इजाफा हो जाता है. जगदीप धनखड़ अभी 74 साल के हैं. ऐसे में उनकी पेंशन 42000 रुपए बनेगी. बता दें कि पद छोड़ने के बाद जगदीप धनखड़ की पूर्व उपराष्ट्रपति और सांसद के तौर पर पेंशन शुरू हो चुकी है, जबकि राजस्थान में पूर्व विधायक के तौर पर उनकी पेंशन अभी प्रक्रियाधीन है.
'गहलोत बोले- बातचीत करें, क्यों इस्तीफा दिया'
राजस्थान विधानसभा से पेंशन शुरू करने के लिए जगदीप धनखड़ के पत्र पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि यह सवाल आपको मुझसे नहीं करना चाहिए, लेकिन फिर भी जगदीप धनखड़ राजस्थान के ही रहने वाले हैं. वह जल्द राजस्थान आएंगे, हम भी उनका स्वागत करने के लिए इंतजार कर रहे हैं. वह यहां आए और बातचीत करें ताकि पता चले कि आखिर उन्होंने इस्तीफा क्यों दिया?
धनखड़ सिंपैथी लेना चाह रहे हैं- खाचरियावास
वहीं, गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि राजस्थान में लोग टॉर्च और मोमबत्ती लेकर धनकड़ जी को ढूंढ रहे हैं. उन्होंने कहा कि सतपाल मलिक ने लोगों को रास्ता दिखाया, लेकिन ये जाट नेताओं की पहचान नहीं है. आप खुल के बोलो कि भाजपा ने मेरे ऊपर जुल्म किए हैं, वह देश से सिंपैथी लेना चाह रहे हैं तो इसके लिए खुलकर बोलना पड़ेगा.
खाचरियावास ने आगे कहा कि अगर भारत सरकार ने धनखड़ जी की पूर्व राज्यपाल और पूर्व उपराष्ट्रपति के नाते मिलने वाली सुविधाएं बंद कर दी हैं, तो उन्हें खुलकर बोलना चाहिए. खाचरियावास ने कहा कि वह खुद तो बिल में छिप कर बैठ गए और चाहते हैं कि जनता उनके लिए खड़ी हो. वहीं, दूसरी तरफ बीजेपी के नेता इस मुद्दे पर बोलने से बच रहे हैं.
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