राजस्थान में डिजिटल सिग्नेचर के जरिए 400 करोड़ रुपये की ठगी, पुलिस के रेडार पर कई चार्टर्ड अकाउंटेंट

राजस्थान में यह गिरोह पिछले दो साल से सक्रिय था. व्यापारियों की जानकारी में बदलाव कर ठगी करने वाले इस नेटवर्क के खिलाफ दिल्ली, जोधपुर और सीकर में छापेमारी की जा रही है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
प्रतीकात्मक फोटो

Rajasthan 400 Crore Fraud: राजस्थान से 400 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि राजधानी जयपुर में डिजिटल हस्ताक्षरों के जरिए 400 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी के मामले में पुलिस जांच तेज हो गई है. जयपुर पुलिस कमिश्नरेट ने इस पूरे प्रकरण में दिल्ली की एक व्यावसायिक संस्था, कई चार्टर्ड अकाउंटेंट और डिजिटल सिग्नेचर जारी करने वाली अधिकृत कंपनियों की भूमिका को संदिग्ध माना है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि करीब 400 लोगों के फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर तैयार कर विभिन्न संस्थाओं के खातों से करोड़ों रुपए निकाल लिए गए.

दिल्ली के रास्ते दुबई भेजा जाता है ठगी का पैसा

इस मामले में बीते सोमवार (6 अप्रैल) को पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरोह के निचले स्तर के गुर्गों को केवल एक से दो लाख रुपए दिए जाते थे. जबकि ठगी की बड़ी राशि दिल्ली की एक संस्था के जरिए दुबई भेजी जा रही थी. पुलिस अब इस नेटवर्क के दुबई कनेक्शन की पड़ताल कर रही है.

Advertisement

2 साल से सक्रिय था गिरोह

राजस्थान में यह गिरोह पिछले दो साल से सक्रिय था. व्यापारियों की जानकारी में बदलाव कर ठगी करने वाले इस नेटवर्क के खिलाफ दिल्ली, जोधपुर और सीकर में छापेमारी की जा रही है. गिरफ्तार आरोपियों सुल्तान खान, नंद किशोर, अशोक कुमार भंडारी, प्रमोद खत्री और निर्मल सोनी को मंगलवार को जयपुर की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है.

कैसे करता था डिजिटल सिग्नेचर का खेल

जांच में सामने आया है कि गिरोह पहले व्यापारियों की विदेश व्यापार महानिदेशालय की आईडी हैक करता था और उसमें बदलाव करता था. इसके बाद जाली दस्तावेजों के जरिए डिजिटल हस्ताक्षर तैयार किए जाते थे. फिर व्यावसायिक संस्थानों के बैंक खातों तक पहुंच बनाकर करोड़ों रुपए ट्रांसफर कर लिए जाते थे. यह राशि पहले दिल्ली और फिर दुबई भेजी जाती थी.

KYC में भी फर्जीवाड़ा

KYC प्रक्रिया में भी बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. जयपुर के परिवादी की केवाईसी जोधपुर से ऑनलाइन की गई, जबकि भुगतान दिल्ली से हुआ और पूरी आईडी को दुबई से संचालित किया जा रहा था. गिरोह का सरगना सुल्तान केवाईसी के बदले दो से पांच हजार रुपए देता था और वीडियो कॉल के जरिए सत्यापन करवा लिया जाता था. आरोपियों के पास से मिले फर्जी पैन कार्ड में ‘इंडिया', ‘इनकम टैक्स' और ‘डिपार्टमेंट' जैसे शब्दों की स्पेलिंग तक गलत पाई गई है.

स्पेशल पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश के अनुसार अब तक इस गिरोह के 13 सदस्यों की पहचान की जा चुकी है. यह भी जांच की जा रही है कि डिजिटल सिग्नेचर जारी करने वाली अधिकृत कंपनियों ने बिना उचित सत्यापन के इतने बड़े स्तर पर प्रमाणपत्र कैसे जारी कर दिए. अधिकारियों का मानना है कि इन कंपनियों के अंदर से मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी ठगी संभव नहीं है.

Advertisement

यह भी पढ़ेंः ACB Action: राजस्थान रोडवेज पर एसीबी की बड़ी कार्रवाई, मुख्य प्रबंधक 20000 रुपये रिश्वत लेते हुआ ट्रैप