जयपुर में 3 मई से ई-रिक्शा की मनमानी पर होगी कार्रवाई, लागू होगा क्यूआर कोड और कलर कोडिंग सिस्टम

जयपुर में 3 मई 2026 से प्रभावी होने वाली इस नई व्यवस्था के तहत शहर के सभी ई-रिक्शा का न केवल जोनवार वर्गीकरण किया जाएगा, बल्कि उनकी पहचान के लिए विशेष कलर कोडिंग और क्यूआर कोड प्रक्रिया को भी अनिवार्य कर दिया गया है.

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फाइल फोटो

Jaipur E-Rickshaw New Rules: राजस्थान की राजधानी जयपुर में बेतरतीब तरीके से दौड़ रहे ई-रिक्शा और उनसे लगने वाले ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन ने अब डिजिटल स्ट्राइक की तैयारी कर ली है. इसके लिए 3 मई से नया नियम लागू होने जा रहा है. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद अब जयपुर पुलिस और परिवहन विभाग मिलकर शहर में ई-रिक्शा के लिए एक व्यापक डिजिटल मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने जा रहे हैं. 

आगामी 3 मई 2026 से प्रभावी होने वाली इस नई व्यवस्था के तहत शहर के सभी ई-रिक्शा का न केवल जोनवार वर्गीकरण किया जाएगा, बल्कि उनकी पहचान के लिए विशेष कलर कोडिंग और क्यूआर कोड प्रक्रिया को भी अनिवार्य कर दिया गया है.

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एक करोड़ दस लाख रुपये की वित्तीय मंजूरी

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए स्थानीय निकाय विभाग की ओर से एक करोड़ दस लाख रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी गई है. जयपुर पुलिस आयुक्तालय ने इस डिजिटल ढांचे के विकास के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली है और अब इसे अमली जामा पहनाने की तैयारी है. पुलिस उपायुक्त यातायात योगेश गोयल द्वारा परिवहन विभाग को भेजे गए निर्देशों के मुताबिक, इस प्रणाली के लागू होने के बाद हर ई-रिक्शा की डिजिटल निगरानी संभव हो सकेगी. इससे न केवल अवैध रूप से संचालित हो रहे रिक्शों पर लगाम लगेगी, बल्कि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में चालक और वाहन की पहचान करना बेहद आसान हो जाएगा.

क्या होगा जयपुर में ई-रिक्शा के लिए नियम

प्रशासन की योजना के अनुसार, जयपुर को अलग-अलग जोन में बांटा जाएगा और प्रत्येक जोन के लिए ई-रिक्शा का रंग निर्धारित होगा. परिवहन विभाग अब जल्द ही शहर के विभिन्न इलाकों में विशेष कैंप आयोजित कर ई-रिक्शा चालकों को क्यूआर कोड वितरित करेगा और उनका डेटाबेस तैयार करेगा. इस पूरी व्यवस्था की निगरानी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एक एनफोर्समेंट स्क्वाड का भी गठन किया जा रहा है. 

अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से जयपुर के प्रमुख बाजारों और व्यस्त चौराहों पर लगने वाले जाम से आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी और शहर की यातायात व्यवस्था में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा. यदि यह सिस्टम जयपुर में लागू किया जाता है तो इससे आमजन को ट्रैफ़िक जाम से निजात मिलेगी. 

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