Rajasthan: जयपुर के फेमस मोती डूंगरी गणेश मंदिर में 42 साल बाद लौटी अनोखी परंपरा, भक्तों की उमड़ी भारी भीड़

पुष्य नक्षत्र के मौके पर भगवान गणेश को 35 जड़ी-बूटियों से बने च्यवनप्राश का भोग लगाया गया और भक्तों को 250 ग्राम के पैकेट प्रसाद में बांटे गए. महंत कैलाश शर्मा की इस पहल ने न केवल पुरानी यादें ताजा की हैं, बल्कि श्रद्धालुओं को सेहत का आशीर्वाद भी दिया है. जानें इस खास 'आयुर्वेदिक प्रसाद' की पूरी कहानी.

विज्ञापन
Read Time: 2 mins
जयपुर: 251 किलो दूध से अभिषेक और फिर मिला 'आयुर्वेदिक' महाप्रसाद; मोती डूंगरी मंदिर में टूटा 4 दशक का रिकॉर्ड
NDTV Reporter

Jaipur News: राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर के आराध्य श्री मोती डूंगरी गणेश मंदिर (Moti Dungri Ganesh Temple) में आस्था के साथ-साथ 'सेहत का आशीर्वाद' बरस रहा है. शनिवार को पुष्य नक्षत्र (Pushya Nakshatra) के पावन संयोग पर मंदिर में 42 साल पुरानी एक अद्भुत परंपरा को फिर से जीवित किया गया है. यहां भगवान गजानन को च्यवनप्राश का भोग (Chyawanprash Bhog) लगाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में बांटा जा रहा है.

251 किलो दूध से भव्य 'महा-अभिषेक'

पुष्य नक्षत्र के विशेष योग में आज सुबह प्रथम पूज्य का दिव्य अभिषेक संपन्न हुआ. भगवान को 251 किलो दूध, 21 किलो दही, घी, शहद और 21 किलो बुरा से तैयार पंचामृत से स्नान कराया गया. इससे पूर्व केसरिया गुलाब जल से भी अभिषेक हुआ. पूजन के पश्चात बप्पा को नवीन स्वर्णमयी पोशाक और अलौकिक श्रृंगार धारण कराया गया.

Advertisement

हर भक्त को 250 ग्राम 'आरोग्य प्रसाद'

Photo Credit: NDTV Reporter

महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि यह परंपरा उनके पिता वैद्य राधेश्याम शर्मा ने शुरू की थी, जो स्वयं साल में एक बार विशेष च्यवनप्राश तैयार कर बप्पा को अर्पित करते थे. इसी स्मृति को सहेजते हुए अब मंदिर परिसर में ही शुद्ध च्यवनप्राश तैयार करवाया गया है. प्रत्येक श्रद्धालु को 250 ग्राम च्यवनप्राश का पैकेट भेंट किया जा रहा है, जिसमें बुजुर्गों के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखते हुए उन्हें प्राथमिकता दी जा रही है.

35 जड़ी-बूटियों का मिश्रण

Photo Credit: NDTV Reporter

यह च्यवनप्राश महज एक प्रसाद नहीं, बल्कि शुद्ध औषधियों का खजाना है. इसे 60 किलो ताजे आंवले, 30 किलो मिश्री, 150 ग्राम असली केसर और रससिंदूर के साथ-साथ अश्वगंधा, गिलोय, शतावरी और ब्राह्मी जैसी 35 शक्तिशाली जड़ी-बूटियों से तैयार किया गया है. खास बात यह है कि इसे 'तरगर्म' तासीर का बनाया गया है, ताकि भक्त किसी भी मौसम में इसका सेवन कर सकें.

ये भी पढ़ें:- जोधपुर में गणगौर सवारी पर पथराव, महिलाओं पर बरसाए पत्थर; गाड़ियों में तोड़फोड़, सड़कों पर उतरा हिंदू समाज