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नौकरी जाने से आहत नर्सिंग कर्मी ने दी थी जान, अब पत्नी को मिलेगी नौकरी-आवास, मुआवजा और पालनहार योजना का लाभ

संविदा नर्सिंगकर्मी दीपक चरवाल के सुसाइड के बाद SMS अस्पताल में शुरू हुआ धरना समाप्त हो गया है. नेताओं की एंट्री के बाद प्रशासन ने पीड़ित परिवार की सभी मांगों को मान लिया है. जानें किन-किन मांगों पर सहमति बनी है.

नौकरी जाने से आहत नर्सिंग कर्मी ने दी थी जान, अब पत्नी को मिलेगी नौकरी-आवास, मुआवजा और पालनहार योजना का लाभ
बच्चे को गोद में लेकर पीड़ित परिवार से करते हुए सांसद हनुमान बेनीवाल की तस्वीर.
X@hanumanbeniwal

Jaipur News: राजस्थान की राजधानी जयपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल (SMS Hospital Jaipur) में शुक्रवार को संविदा नर्सिंग कर्मी दीपक चरवाल के सुसाइड (Deepak Charwal Suicide) के बाद जो धरना-प्रदर्शन शुरू हुआ था, वह अब खत्म हो गया है. प्रशासन और पीड़ित परिवार के बीच चली लंबी बातचीत में 4 मांगों पर सहमति बन गई है. इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का भी ऐलान किया है.

इन मांगों पर बनी सहमति

  1. दीपक की पत्नी को मेडिकल कॉलेज में ही संविदा पर नौकरी दी जाएगी.
  2. सभी की तरफ से चंदा इकट्ठा करके परिवार को एक बड़ा वित्तीय पैकेज दिया जाएगा.
  3. सांसद कोटे और प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिए परिवार को घर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी.
  4. आरएलपी पार्टी की तरफ से भी पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी.
  5. इसके साथ ही, मृतक के परिवार को राजस्थान सरकार की 'पालनहार योजना' से भी सीधा जोड़ा जाएगा.

दीपक चरवाल ने सुसाइड क्यों किया था?

मृतक दीपक चरवाल पिछले 4 साल से महिला चिकित्सालय में बतौर संविदा नर्सिंग स्टाफ अपना काम कर रहे थे. 12 जून को अचानक अस्पताल प्रशासन की तरफ से एक आदेश जारी हुआ. इसके तहत महिला चिकित्सालय से करीब 150 संविदा कर्मियों को नौकरी से निकाल दिया गया. इसके अलावा जेके लोन अस्पताल के भी लगभग 200 कर्मचारियों को हटाने का नोटिस थमा दिया गया. अचानक अपनी नौकरी जाने और बेरोजगार होने की खबर ने दीपक को इस कदर परेशान कर दिया कि उन्होंने जहर खाकर अपनी जान दे दी.

सुसाइड के बाद अस्पताल हुआ भारी हंगामा

जैसे ही दीपक की मौत की सूचना अस्पताल परिसर में फैली, वहां काम करने वाले संविदा कर्मियों का गुस्सा भड़क उठा. बड़ी संख्या में कर्मचारी एसएमएस मेडिकल कॉलेज परिसर में जमा हो गए और धरने पर बैठ गए. कर्मचारियों का साफ कहना था कि जो लोग इतने लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें बिना किसी ठोस कारण के अचानक हटा देना पूरी तरह से गलत और अमानवीय है. हालात इतने ज्यादा तनावपूर्ण हो गए कि मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा.

इमरजेंसी के बाहर प्रदर्शन में नेताओं की एंट्री

घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था. परिजनों और साथी कर्मचारियों ने एसएमएस इमरजेंसी के बाहर ही अपना धरना शुरू कर दिया. परिवार की तरफ से 50 लाख रुपये के मुआवजे और नौकरी की मांग रखी गई. माहौल उस वक्त और ज्यादा संवेदनशील हो गया जब बाकी साथी कर्मचारियों ने भी सुसाइड करने की धमकियां देना शुरू कर दिया. इस गर्माए हुए माहौल के बीच कांग्रेस नेता रफीक ख़ान और अमीन कागज़ी भी धरने पर बैठे लोगों का साथ देने मौके पर पहुंच गए, जिन्हें बाद में नागौर सासंद हनुमान बेनीवाल का भी साथ मिला.

नेताओं की एंट्री के बाद हुआ समझौता

मामले को शांत कराने के लिए प्रशासन तुरंत एक्टिव हुआ और परिजनों के साथ वार्ता की टेबल पर बैठा. यह बातचीत सफल रही और प्रशासन के सकारात्मक आश्वासन के बाद धरना खत्म कर दिया गया. इसके बाद हनुमान बेनीवाल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'दीपक के परिजनों से बातचीत सफल रही है. मैंने भी आरएलपी परिवार की तरफ से दिवंगत की पत्नी व परिजनों को 5 लाख रुपये देने की घोषणा की है.'

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