कोटा के चंद्रेसल मठ में महंत देवानंद महाराज की हत्याकांड मामले में नए खुलासे हुए हैं. आरोपी एडवोकेट संतोष राय की गिरफ्तारी के बाद परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं. मठ के पुजारी नंदनवन ने भी पहली बार पूरी खौफनाक साजिश का खुलासा किया है, जिसमें संत देवानंद की हत्या के साथ-साथ उन्हें भी जेल भिजवाने की तैयारी की गई थी. नंदनवन ने एनडीटीवी से खास बातचीत में पूरी साजिश से पर्दा हटाया.
ट्रस्ट का अध्यक्ष बनना चाहता था वकील
चंद्रेसल मठ की घटना महज एक हत्या नहीं, बल्कि करोड़ों की संपत्ति और सैकड़ों बीघा जमीन पर कब्जे की कथित है. पुलिस ने मामले में एडवोकेट संतोष राय, सुपारी किलर अद्वितीय वर्मा, पुष्पेंद्र और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. जांच में सामने आया कि संतोष राय की नजर मठ की करीब 700 बीघा जमीन और बैंक खातों में जमा 4 करोड़ रुपए से अधिक की राशि पर थी. वह खुद को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाकर पूरे मठ पर नियंत्रण चाहता था.
पहले विश्वास जीता, फिर रची साजिश
मठ के पुजारी नंदनवन ने बताया कि करीब छह महीने पहले संतोष राय ने मठ में आना-जाना शुरू किया. उसने विकास कार्य, गोशाला निर्माण और बड़े प्रोजेक्ट्स के नाम पर ट्रस्ट सदस्यों का विश्वास जीता. इसी दौरान ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए और अलग ट्रस्ट बनाने की तैयारी शुरू कर दी. नंदनवन के मुताबिक, संतोष राय महंत देवानंद को ट्रस्ट से हटाकर स्वयं अध्यक्ष बनना चाहता था. उसने नए ट्रस्ट के लिए लगाई गई अर्जी पर भी आपत्ति दर्ज कराई थी.
मठ में पार्टी, रेकी और फिर साजिश
पुजारी नंदनवन का दावा है कि वारदात से चार दिन पहले संतोष राय एक युवक को लेकर मठ आया था. जैसे ही उसने नंदनवन को देखा, युवक को लेकर बाहर चला गया और कहा कि उसे नदी में मगरमच्छ दिखाने ले जा रहा है. अब नंदनवन को शक है कि वह युवक हत्या की रेकी के लिए लाया गया था. इतना ही नहीं, करीब 6 महीने पहले संतोष राय ने मठ में एक बड़ी पार्टी भी आयोजित की थी, जिसमें 200 से ज्यादा लोग शामिल हुए थे. पार्टी में कई वकील और प्रभावशाली लोग भी मौजूद थे.
हत्या की रात का जिक्र करते हुए नंदनवन आज भी सहम जाते हैं. उनके मुताबिक, हमलावरों ने उनके कमरे की बाहर से कुंडी लगा दी थी. देर रात गर्मी लगने पर उन्होंने दरवाजा खोलने की कोशिश की लेकिन दरवाजा नहीं खुला. उन्हें शक हुआ कि कुछ गड़बड़ है. उन्होंने गांव के एक व्यक्ति को फोन किया. जब दरवाजा खोला गया और वे बाहर निकले तो महंत देवानंद महाराज खून से लथपथ पड़े मिले. उनके शरीर पर चाकुओं के कई वार थे और सांसें चल रही थीं. ग्रामीणों की मदद से उन्हें अस्पताल ले जाने का प्रयास किया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी.
नंदनवन था शक के घेरे में, उसने ही हत्यारों तक पहुंचाया
घटनास्थल की परिस्थितियां ऐसी थीं कि पुलिस का पहला शक पुजारी नंदनवन पर गया. खून से सने कपड़े और मौके पर मौजूदगी के कारण उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई. करीब 6 दिन तक पुलिस हिरासत में रहने के बाद जांच में नंदनवन की भूमिका नहीं मिली और उन्हें क्लीन चिट दे दी गई. नंदनवन कहते हैं कि उन्हें भगवान और कानून पर भरोसा था कि सच सामने आएगा और आखिरकार वही हुआ. नंदनवन ने पुलिस जांच में भी अहम भूमिका निभाई. उन्होंने बताया कि बंद कमरे के दरवाजे के छेद से उन्होंने एक युवक को देखा था. उन्होंने उसका हुलिया पुलिस को बताया, जिसके आधार पर स्केच तैयार किया गया. इसी सुराग ने जांच को नई दिशा दी और आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिली.

पुजारी नंदनवन
मठ में ही हुई थी आरोपी आदित्य की शादी
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह भी सामने आया कि हत्या में नामजद आरोपी आदित्य वर्मा और उसकी पत्नी जैक्शन जॉर्ज का विवाह संस्कार भी इसी मठ में हुआ था. ग्रामीणों के अनुसार, कोर्ट मैरिज के बाद दोनों की हिंदू रीति-रिवाज से शादी के अनुष्ठान चंद्रेसल मठ में ही संपन्न हुए थे. इन अनुष्ठानों में संतोष राय की भी भूमिका बताई जा रही है. कुछ ही समय बाद उसी मठ के महंत को मौत के घाट उतारने की साजिश में आदित्य सुपारी किलर बन गया.
वकील से RTU का स्टाफ भी परेशान था
महंत हत्याकांड में गिरफ्तारी के बाद अब राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (RTU Kota) के कई कर्मचारी भी खुलकर सामने आने लगे हैं. आरोपी संतोष राय की पत्नी राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में कर्मचारी हैं. इसलिए उसका आना-जाना राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में भी रहा और उसने वहां भी विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को झूठी शिकायतों से परेशान कर रखा था.
आरटीयू के पूर्व अधिकारियों और प्रोफेसरों का आरोप है कि संतोष राय आरटीआई और शिकायतों के जरिए कर्मचारियों को परेशान करता था. कई लोगों की पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ वर्षों तक अटके रहे. पूर्व कुलपति और प्रोफेसरों का कहना है कि झूठी शिकायतों के कारण कई कर्मचारियों को मानसिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. कुछ मामलों में अदालतों ने संतोष राय पर जुर्माना भी लगाया था.
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