जैसलमेर जिले के रामदेवरा कस्बे में इंजीनियरिंग का एक अनोखा और हैरतअंगेज कारनामा देखने को मिला है. यहां 18 हजार स्क्वायर फीट में बनी दो मंजिला नागौर धर्मशाला को बिना तोड़े-फोड़े जैक की मदद से करीब 3 फीट तक ऊंचा उठाया जा रहा है. हरियाणा से आई इंजीनियरों और श्रमिकों की टीम ने इस चुनौतीपूर्ण काम में 80 फीसदी से अधिक सफलता हासिल कर ली है.
दरअसल, नागौर धर्मशाला बरसात के दिनों में जलभराव की समस्या से जूझ रही थी. भवन का लेवल नीचे होने के कारण परिसर में पानी भर जाता था, जिससे आवागमन में भारी परेशानी होती थी. धर्मशाला को तोड़कर दोबारा बनाना बेहद खर्चीला और समय लेने वाला काम था. ऐसे में भवन को जैक की सहायता से ऊंचा उठाने का फैसला लिया गया.
अभी कितना काम और है बाकी?
इस कार्य के लिए हरियाणा के इंजीनियर प्रवीण कुमार के नेतृत्व में 80 से अधिक श्रमिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम रामदेवरा पहुंची. करीब 72 दिनों से लगातार दिन-रात काम करते हुए टीम ने 18 हजार स्क्वायर फीट में फैले इस विशाल भवन को लगभग 3 फीट तक ऊपर उठाने में सफलता हासिल की है. अब केवल 20 फीसदी काम शेष है, जिसे अगले 10 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. स्थानीय लोगों के लिए यह नजारा किसी अजूबे से कम नहीं है.
जैसलमेर जिले में पहली बार बड़ी उपलब्धि
सैकड़ों लोग इस अनूठे इंजीनियरिंग कार्य को देखने पहुंच रहे हैं. बिना किसी बड़े नुकसान और तोड़फोड़ के इतने बड़े भवन को उठाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि जैसलमेर जिले में इस तरह का यह पहला मामला है. इंजीनियर प्रवीण कुमार का कहना है कि इसी तकनीक से ईंट, पत्थर और अन्य निर्माण वाले मकानों या भवनों को भी सुरक्षित तरीके से ऊंचा उठाया जा सकता है. रामदेवरा में किया गया यह कार्य इंजीनियरिंग कौशल और तकनीकी दक्षता का बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आया है.