जैसलमेर बस हादसा मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के सचिव और सभी राज्यों के मुख्य सचिव को निर्देश दिए. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए स्लीपर बसों में नियमों की पालना सुनिश्चित करने को कहा. आयोग के स्पष्ट निर्देश हैं कि नियमों की अवहेलना करके बनाई गई स्लीपर बसों का निरीक्षण किया जाए. साथ ही, ऐसी बसों को रोड से हटाया जाए. केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के सचिव को यह आदेश दिया गया है कि देशभर में कैसा मैकेनिज्म बनाएं. ताकि यह सुनिश्चित हो पाए की कोई भी बस की बॉडी का निर्माण करता इन नियमों का उल्लंघन न कर सके. इसके साथ ही, बस के बॉडी निर्माण में सभी मानकों की अनुपालन सुनिश्चित हो.
जैसलमेर में हुआ था दर्दनाक हादसा
दरअसल, 14 अक्टूबर को दोपहर करीब 3 बजे जैसलमेर से 15 किलोमीटर दूर एक स्लीपर एसी बस में आग लग गई थी. इस दुर्घटना में 21 लोगों की जलकर मौत हो गई थी. इस मामले में आयोग ने केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (CIRT) को बस की बॉडी की निरीक्षण रिपोर्ट बनाने के निर्देश दिए थे.
संस्थान ने 3 नवंबर को पेश की रिपोर्ट
संस्थान ने 3 नवंबर को एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें बस के बॉडी निर्माण में कई खामियां पाई गईं. इसे सीधे तौर पर केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR) के तहत निर्धारित सुरक्षा मानकों का उल्लंघन माना गया. नियमों के मुताबिक, चालक के केबिन में पार्टिशन दरवाजा अनुमति योग्य नहीं है.
इन नियमों का हुआ उल्लंघन
नियमों के मुताबिक, 12 मीटर लंबाई वाली बस के लिए न्यूनतम 4 इमरजेंसी गेट और 12 मीटर से अधिक लंबाई वाली बस के लिए 5 इमरजेंसी गेट अनिवार्य हैं. इसके अलावा प्रत्येक बस में फायर डिटेक्शन एवं सप्रेशन सिस्टम (FDSS) अनिवार्य किया गया है. ये सभी प्रावधान हादसे वाली बस में नहीं पाए गए हैं. जांच में निष्कर्ष निकला कि संबंधित बस के बॉडी निर्माण CMVR एवं AIS:119 के तहत स्लीपर कोचों के लिए बनाए नियमों की अनुपालन नहीं की गई. इसके कारण यात्री सुरक्षा से समझौता हुआ.
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