150 साल बाद बाहर निकाली दादा गुरुदेव महाराज की पवित्र चादर, 1.08 करोड़ भक्त पूरे विश्व में कर रहे इकतीसे का पाठ

इस यात्रा में 21 सजे घोड़े, 21 ऊंट, 2 हाथी, 20 नासिक ढोल की टीम, कच्ची घोड़ी नृत्य, विशेष रूप से सजाई गई रथ के साथ ही कई प्रांतों से आए लोक कलाकार शाम‍िल हुए.

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दादा गुरुदेव जिनदत्तसुरी जी महाराज की पवित्र चादर को विधिवत पूजन-अर्चना के साथ बाहर लाया गया.

स्वर्णनगरी जैसलमेर में आयोजित तीन दिवसीय दादागुरुदेव चादर महोत्सव के तहत शुक्रवार को आस्था, श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत भव्य वरघोड़ा निकाला गया. सुबह ऐतिहासिक सोनार दुर्ग स्थित पार्श्वनाथ जैन मंदिर के ज्ञान भंडार से दादा गुरुदेव जिनदत्तसुरी जी महाराज की पवित्र चादर को विधिवत पूजन-अर्चना के साथ बाहर लाया गया. लगभग 150 वर्षों बाद यह पवित्र चादर मंदिर के ज्ञान भंडार से बाहर लाई गई है. 872 वर्ष से अधिक प्राचीन इस चादर का जैन समुदाय में विशेष धार्मिक महत्व है और इसे अत्यंत श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है. 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालु विश्व में दादा गुरु इकतीसे का पाठ कर रहे हैं. 

विशेष रूप से सजी रथ में विराजित किया 

जैन मुनियों के सानिध्य में पवित्र चादर को सोनार किले से गड़सीसर सर्किल तक लाया गया, जहां इसे विशेष रूप से सजाए गए भव्य रथ में विराजित किया गया. इसके बाद गच्छाधिपति श्री जिन प्रभमणि सूरीश्वरजी महाराज के सानिध्य में भव्य वरघोड़ा रवाना हुआ. महाराष्ट्र सरकार में मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने हरी झंडी दिखाकर इस शोभायात्रा को रवाना किया.

चादर महोत्सव में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे.

ड्राेन के माध्यम से पुष्प वर्षा की गई 

इस भव्य वरघोड़े में हजारों श्रद्धालु, जैन संत-मुनि, साध्वी और महात्मा शामिल हुए.शोभायात्रा में 21 सजे-धजे घोड़े, 21 सजे-धजे ऊंट, 2 हाथी, 20 नासिक ढोल की टीमें, कच्ची घोड़ी नृत्य दल, विशेष रूप से सजाया गया रथ तथा विभिन्न प्रांतों से आए लोक कलाकार आकर्षण का केंद्र बने. ड्रोन के माध्यम से पुष्प वर्षा भी की गई, जिससे पूरा वातावरण भक्ति और उल्लास से भर उठा.

गड़सीसर सर्किल से निकला यह भव्य वरघोड़ा नगर परिषद, एयरफोर्स सर्किल, नीरज सर्किल, हनुमान सर्किल और गीता आश्रम मार्ग से होते हुए डेडानसर मेला ग्राउंड स्थित महोत्सव स्थल पहुंचा. रास्ते भर श्रद्धालुओं ने पवित्र चादर के दर्शन कर जयकारों के साथ श्रद्धा व्यक्त की.

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दादागुरुदेव के 31वां का सामूहिक पाठ

महोत्सव स्थल पर परंपरानुसार पवित्र चादर का विधिवत अभिषेक किया. इसके बाद दादागुरुदेव के इकतीसा का सामूहिक पाठ हुआ. इस दौरान विश्वभर के जैन श्रद्धालु 1 करोड़ 8 लाख इकतीसा पाठ कर एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया. महोत्सव में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग पूरे उत्साह और उमंग के साथ शामिल हो रहे हैं. पवित्र चादर के प्रति उनकी गहरी आस्था स्पष्ट रूप से देखने को मिल रही है. श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचकर इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बन रहे हैं. पूरे शहर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण बना हुआ है.आयोजन को लेकर प्रशासन और समिति की ओर से सुरक्षा व व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए गए हैं.

"गौरव और भाग्यशाली पल है"

आचार्य श्रीजिनप्रभमणि सुरी जी महाराज ने कहा कि अमर सागर जैन मंदिर कि स्थापना 1997 में हुई थी, तब चादर की पेटी खुली नहीं थी. प्रतिष्ठा के स्थल पर विराजित कि गई थी. आज यह चादर बाहर आई है. हम भाग्यशाली हैं कि हम इसे देख पा रहे हैं और दर्शन कर पा रहे हैं. यह गौरव का पल है. अब इसका अभिषेक करने का मौका है. आज दादा गुरुदेव का एक साथ, एक समय, पूरे विश्व में 1 करोड़ 8 लाख इकतीसा पाठ करने का अवसर मिला है.

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उन्होंने कहा कि जैसलमेर के वृद्धिचंद्र जी महाराज के भावों को नमन करते हैं, जो इसे करीब डेढ़ सौ साल पहले इस पवित्र चादर को पाटन से लाए, और जैसलमेर में विराजित किया. जैसलमेर के जैन ट्रस्ट और यहां के जैन समाज के प्रवासियों का आभार, जिन्होंने इसे डेढ़ सौ साल से संभालकर रखा.

जैसलमेर वो क्षेत्र है, जहां देश नहीं पूरा विश्व आता है, और यहां जैन समाज नहीं 36 कौम आती है. यहां एक म्यूजियम बनना चाहिए, जिससे प्रचार हो कि जैन धर्म कैसा है? उसे प्रदर्शित करें. 

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