Rajasthan News: राजस्थान के जालोर जिले का नरसाणा गांव आज अपने सामूहिक प्रयास से चर्चा में है. वर्षों तक सरकारी सहायता का इंतजार करने के बाद ग्रामीणों ने खुद निर्णय लिया और बच्चों के लिए भव्य दो मंजिला राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल भवन तैयार कर दिया. इस आधुनिक भवन का उद्घाटन फरवरी में प्रस्तावित है.
बरामदे से आधुनिक भवन तक
पहले राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नरसाणा केवल 7 कमरों में चलता था जबकि विद्यार्थियों की संख्या 450 से ज्यादा थी. प्रिंसिपल और स्टोर रूम हटाने के बाद पढ़ाई के लिए सिर्फ 5 कमरे बचते थे. बाकी बच्चे धूप, बारिश और ठंड में बरामदों में बैठकर पढ़ते थे. शौचालय जैसी मूल सुविधा भी पर्याप्त नहीं थी.
जमीन मिली पर बजट नहीं
सरकार ने स्कूल के लिए नई जमीन तो दे दी लेकिन निर्माण के लिए बजट स्वीकृत नहीं हुआ. स्थिति गंभीर होती देख वर्ष 2021 में गांव ने बड़ा कदम उठाने का निश्चय किया.
मंदिर की बैठक से शुरू हुआ बदलाव
सरपंच दुर्गा कंवर के ससुर और पूर्व एडिशनल बीडीओ जसवंत सिंह की पहल पर मंदिर में बैठक हुई. तय हुआ कि गांव अपने बच्चों के लिए खुद स्कूल बनाएगा. इसके बाद ग्रामीणों, प्रवासी परिवारों और पुराने विद्यार्थियों से सहयोग मांगा गया.
4.50 करोड़ का जनसहयोग
100 से अधिक लोगों ने 51 हजार से 21 लाख रुपए तक का योगदान दिया. हर घर की भागीदारी से कुल 4.50 करोड़ रुपए जुटे. यह राशि किसी संस्था से नहीं बल्कि समाज की एकजुटता से आई.
सुविधाओं से लैस आधुनिक स्कूल
नए भवन में 21 कक्षाएं, 2 बड़े हॉल, अंडरग्राउंड इंडोर स्टेडियम, छोटे बच्चों के लिए प्ले एरिया, विज्ञान प्रयोगशाला, 50 लाख का फर्नीचर और 10 हजार लीटर क्षमता का वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया गया है. उद्घाटन से पहले गांव की महिलाएं रोज स्कूल पहुंचकर साफ सफाई और सजावट कर रही हैं. यह स्कूल अब पूरे गांव की पहचान बन गया है.
सरकार को सौंपेंगे भवन
भवन ग्रामीणों ने बनाया है लेकिन इसका संचालन सरकार के पास रहेगा. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित कई नेताओं को उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया गया है. प्रिंसिपल रामगोपाल शर्मा के अनुसार अब बच्चे सम्मान और सुरक्षित माहौल में पढ़ सकेंगे. नरसाणा ने दिखा दिया कि समाज ठान ले तो बदलाव संभव है.
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