पुत्र वियोग में त्याग दिए थे प्राण, आज घर-घर में होती है पूजा; जानें जसोल धाम की कहानी

Jasoldham Mela News: जसोल धाम में माजीसा रानी भटियाणी के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु पैदल यात्रा कर पहुंच रहे हैं. सोमवार को भादवा सुदी तेरस के अवसर पर वार्षिक मेले का आयोजन होगा. रानी स्वरूप कंवर के चमत्कारी किस्से और उनकी आस्था का केंद्र बना यह धाम, प्रदेश और देशभर के श्रद्धालुओं का मनमोहक स्थल है.

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Jasol Dham, Rani Bhatiani

Rani Bhatiani Ki Kahani: राजस्थान में कई लोक देवता जन-जन की आस्था का केंद्र बने हुए है, समकालीन लोक देवता रामदेवजी, पाबू जी, तेजाजी, गोगाजी, मल्लीनाथ के साथ अब जसोल धाम के प्रति भी लोगों की गहरी आस्था है, यहां रोजाना सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन कर अपनी मनोकामना और खुशहाली की कामना करते है. जसोल में रानी भटियाणी जिसे माजीसा के रूप में भी पूजा जाता है. हर साल की तरह इस साल भी सोमवार को भादवा सुदी तेरस के दिन मंदिर में भव्य वार्षिक मेले का आयोजन होगा. उससे पहले ही श्रद्धालु बड़ी संख्या में जत्थों के रूप में पैदल जसोल पहुंचने शुरू हो गए है.

सोमवार को भाद्रपद मेले में करीब 5 लाख श्रद्धालु दर्शन करेंगे. मंदिर के पास ही माजीसा मित्र मंडल द्वारा भव्य भजन संध्या का आयोजन होगा. जहां नामी भजन गायक अपनी प्रस्तुतियां देंगे. मन्दिर प्रशासन और पुलिस प्रशासन द्वारा भी श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए व अन्य व्यवस्थाएं भी पूरी कर ली गई है.

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पुत्र वियोग में त्याग दिए थे प्राण

जन-जन की आस्था व पश्चिमी राजस्थान मेमपुजी कही जाने वाली रानी भटियाणी(माजीसा) के बारे में कहा जाता है कि रानी भटियाणी का नाम स्वरूप कंवर था. उनका जन्म जैसलमेर जिले के जोगीदास गांव में ठाकुर श्री जोगराज सिंह जी भाटी के वंश में विक्रम सम्वत् 1725 में हुआ था. 20 वर्ष की उम्र में इनकी शादी जसोल के राजा राव कल्याण सिंह से हुआ. ठाकुर कल्याण सिंह की पहली पत्नी रानी देवड़ी, स्वरूप कंवर से ईर्ष्या करती थी.

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रानी स्वरूप कंवर ने एक पुत्र का जन्म दिया, जिसका नाम कुंवर लाल सिंह रखा गया. कुछ समय बाद देवड़ी ने भी पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम प्रतापसिंह कंवर रखा गया. कहते हैं कि रानी देवड़ी ने यह सोचकर कि कहीं लाल सिंह कंवर रियासत का मालिक न बन जाए, उसने दासी के हाथों जहर पिलाकर लालसिंह को मरवा दिया. पुत्र वियोग में रानी स्वरूप कंवर बीमार हो गई और उन्होंने भी अपने प्राण त्याग दिए, बाद उनका सतीत्व उभर कर आया.

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जब हजारों दीपक की रोशनी से चमका श्मशान

मान्यता के अनुसार रानी स्वरूप कंवर के पीहर जैसलमेर से 2 ढोली शंकर और ताजिया, राव कल्याण सिंह जी के दरबार में आए और रानी स्वरूप कंवर से मिलने की इच्छा जताई. जिसपर रानी देवड़ी ने उनको रानी स्वरूप कंवर की समाधि के पास भेज दिया. जहां उनकी मृत्यु पर दोनों ने दुखी होकर अरदास लगाई. दोनों ढोलियों की पुकार सुनकर रानी उनके सामने प्रकट हुई और श्मशान हजारों दीपक की रोशनी से नहा उठा.

ढोलियो ने ढोल बजाकर इस चमत्कार का बखान किया. इसके बाद भी रानी के चमत्कारों का सिलसिला जारी रहा तथा रानी स्वरूप कंवर अपने भक्तों के दुख दूर करती रही. तब से आज तक लोग अपने दुखों को दूर करने व सन्तान प्राप्ति के लिए रानी भटियाणी की शरण में आते रहते हैं एवं उनके भजनों द्वारा उनका गुणगान करते हैं.

प्रदेश के साथ गुजरात, हरियाणा से भी पहुंच रहें श्रद्धालु

माता रानी भटियाणी के दर्शन के लिए श्रद्धालु प्रदेश के साथ अन्य राज्यों से पहुंच रहे है. जहां वह माता के दरबार में कुमकुम और चुनरी के साथ पूजा अर्चना कर मन्नतें मांगते है. रविवार रानी स्वरूप कंवर के समाधि स्थल पर जैसलमेर के सुनहरी पत्थरों भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है. श्रद्धालुओं के सुविधाओं के धर्मशाला और भोजनशाला की सुविधा भी उपलब्ध है. रानी भटियाणी मन्दिर संस्थान भी सामाजिक सरोकार के तहत कई कार्य कर रहा है. मन्दिर संस्थान द्वारा कन्या पूजन, प्रकृति संरक्षण, कमजोर तबके के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति सहित कई जनहित के कार्यों में अपनी भागीदारी निभा रहा है.

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