झालावाड़: मनरेगा में बड़ा खेल! सरपंच पर सचिव के फर्जी साइन कर मस्टररोल निकालने का आरोप, मौके से मजदूर गायब

Rajasthan News: झालावाड़ की गुराड़िया झाला पंचायत में मनरेगा में फर्जीवाड़ा सामने आयाहै. ग्राम सचिव ने सरपंच पर फर्जी हस्ताक्षर के आरोप लगाए है.

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नीरीक्षण करते हुए ग्राम सचिव
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 Jhalawar MGNREGA Scam: राजस्थान के झालावाड़ जिले के गंगधार क्षेत्र की ग्राम पंचायत गुराड़िया झाला में मनरेगा कार्यों में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. आरोप है कि सरपंच के जरिए ग्राम सचिव के फर्जी हस्ताक्षर कर मस्टररोल जारी कर दिए गए. और कागजों में मजदूरों की उपस्थिति दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग करने की कोशिश की. मामले का खुलासा तब हुआ जब खुद ग्राम सचिव ने निरीक्षण किया और हकीकत कागजों से बिल्कुल जुदा मिली.

कागजों में 'मजदूरों की फौज', धरातल पर सन्नाटा

जिसके बाद दौरे के दौरान असलियत ने सारी फर्जीवाड़े की कलाई खोल कर दी. कई कार्यस्थलों पर कागजों में दर्ज मजदूरों की संख्या और मौके की हकीकत में बड़ा अंतर मिला, जबकि कुछ जगहों पर काम तक शुरू नहीं हुआ. ग्राम पंचायत गुराड़िया झाला में पांच विकास कार्य स्वीकृत किए गए थे. जांच के दौरान कई कार्यस्थलों पर ना तो मजदूर मिले और ना ही काम होता दिखाई दिया. वही ग्राम सचिव ने साफ तौर पर कहा की उन्हें इस मस्टरोल के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है. उन्होंने सिर्फ पिछले पखवाड़े की मस्टरोल पर साइन किए थे.

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जांच में सामने आई खामियां 

ग्राम सचिव ने जानकारी देते हुए बताया कि मामला उस वक्त सामने आया जब उन्हें फर्जीवाड़े की शिकायत मिली, जिसके बाद वह निरीक्षण करने पहुंचे. हालात ऐसे थे कि मियावाकी प्लांटेशन कार्य में कागजों में 78 मजदूर दर्ज किए गए  थे, लेकिन मौके पर केवल 48 मजदूर ही मौजूद पाए गए. वहीं कई मजदूरों के पास काम करने के लिए फावड़ा और गेती जैसे उपकरण तक नहीं थे.

पुराने स्कूल परिसर में नर्सरी विकास कार्य में 18 मजदूर दर्ज थे, लेकिन मौके पर केवल 8 मजदूर मिले और काम बंद पड़ा था. इसी तरह ग्रेवल सड़क और पुलिया निर्माण कार्य में भी कागजों में मजदूर दिखाए गए, लेकिन धरातल पर कार्य नजर नहीं आया. चरागाह एवं पौधारोपण कार्य में भी मजदूरों की संख्या में बड़ा अंतर मिला.

सबसे बड़ा मामला सेमली छरोत में ग्रेवल सड़क और पुलिया निर्माण कार्य का सामने आया, जहां मस्टररोल में 18 मजदूर दर्ज थे, लेकिन मौके पर एक भी मजदूर मौजूद नहीं मिला और कार्य पूरी तरह बंद मिला.

मेरे साइन फर्जी हैं-ग्राम सचिव

 ग्राम सचिव ने इस पूरे मामले में सरपंच की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. सचिव ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल 26 अप्रैल से 10 मई तक के मस्टररोल पर हस्ताक्षर किए थे. 11 मई से 25 मई के बीच जारी किए गए मस्टररोल के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है और उन पर किए गए हस्ताक्षर पूरी तरह फर्जी हैं.

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार

इस खुलासे के बाद मनरेगा कार्यों की पारदर्शिता और निगरानी तंत्र पर सवालिया निशान लग गए हैं. फर्जी हस्ताक्षर के जरिए मस्टररोल जारी करना एक गंभीर वित्तीय अनियमितता और आपराधिक मामला है. फिलहाल ग्रामीणों और क्षेत्र के लोगों की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि इस कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या सख्त कदम उठाए जाते हैं.

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