झुंझुनूं कलेक्टर समेत 6 बड़े अफसरों की कोर्ट में पेशी, मुख्यमंत्री जन आवास योजना के लाभार्थियों को जल्द मिलेंगे 500 फ्लैट्स!

झुंझुनूं में बरसों से घर का इंतजार कर रहे 1536 परिवारों के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया है. कलेक्टर और एडीएम समेत 6 अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब कर 6 करोड़ रुपये के चेक जमा कराए गए हैं. आदेश न मानने पर 3 साल की जेल और भारी जुर्माने की तलवार लटक रही है.

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झुंझुनूं मुख्यमंत्री जन आवास योजना: 1536 परिवारों का इंतजार खत्म, आयोग की सख्ती के बाद 6 करोड़ जमा और घर मिलने का रास्ता साफ
NDTV Reporter

Rajasthan News: अगर आप भी मुख्यमंत्री जन आवास योजना (CMJAY) के तहत अपने घर का सपना देख रहे हैं और सिस्टम की सुस्ती से परेशान हैं, तो झुंझुनूं (Jhunjhunu) से आई यह खबर आपके लिए मिसाल है. झुंझुनूं के जिला उपभोक्ता आयोग (DCC) ने शनिवार को कड़ा रुख अपनाते हुए जिले के कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग (DM Arun Garg) समेत 6 बड़े अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब कर लिया. आयोग की इस सख्ती का असर यह हुआ कि वर्षों से लंबित मामले में प्रशासन को न केवल झुकना पड़ा, बल्कि 6 करोड़ रुपये के चेक भी आयोग के सामने जमा कराने पड़े.

1536 परिवारों के साथ हुआ था 'अन्याय'

यह पूरा विवाद झुंझुनूं शहर के मंड्रेला रोड स्थित मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत बने फ्लैटों से जुड़ा है. यहां कुल 1536 लाभार्थियों को फ्लैट मिलने थे, लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी उन्हें न तो घर का कब्जा मिला और न ही उनकी जमा राशि लौटाई गई. उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष मनोज मील ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए एसपी के जरिए सम्मन जारी किए थे. कोर्ट की फटकार के बाद प्रशासन ने अब दावा किया है कि 500 फ्लैट्स का काम युद्ध स्तर पर पूरा कर जल्द ही कब्जा दे दिया जाएगा.

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इन बड़े चेहरों को होना पड़ा कोर्ट में पेश

उपभोक्ता आयोग की सख्ती का आलम यह था कि जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग के साथ एडीएम डॉ. अजय आर्य, नगर परिषद आयुक्त देवीलाल बोचलिया, एसडीएम कौशल्या विश्नोई, पूर्व एसडीएम हवाई सिंह यादव और तहसीलदार महेंद्र मूंड को खुद कोर्ट के सामने हाजिर होना पड़ा. नगर परिषद ने उपभोक्ताओं के बकाया और मुआवजे के लिए करीब 6 करोड़ रुपये के चेक आयोग में जमा करवा दिए हैं. साथ ही, दोषी ठेकेदार कंपनी असाही इंफ्रास्ट्रक्चर (Asahi Infrastructure & Projects Ltd.) से 27 करोड़ रुपये की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.

3 साल की जेल और भारी जुर्माने का खतरा

प्रशासन की इस अचानक बढ़ी सक्रियता के पीछे कानून का डंडा है. यदि आयोग के आदेशों की अवहेलना होती, तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के तहत संबंधित अधिकारियों को 3 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता था. फिलहाल, कोर्ट की इस कार्रवाई से उन 1536 परिवारों में न्याय की उम्मीद जगी है जो बरसों से अपने आशियाने की राह देख रहे थे. अब देखना यह है कि प्रशासन अपने वादे के मुताबिक कितनी जल्दी चाबियां लाभार्थियों को सौंपता है.

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