Rajasthan News: पश्चिमी राजस्थान में जोजरी, लूनी और बांडी नदी के बढ़ते प्रदूषण और टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े पर्यावरणीय संकट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपना रुख और कड़ा कर दिया है. इसी कड़ी में शीर्ष अदालत द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय टीम ने शनिवार को बालोतरा का दौरा किया. रिटायर्ड जस्टिस संगीत लोढ़ा की अगुवाई में टीम ने शहर की प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्थाओं का जमीनी स्तर पर बारीकी से निरीक्षण किया.
जमीनी हकीकत का लिया जायजा
टीम ने सबसे पहले जोजरी नदी के प्रदूषित पानी से प्रभावित डोली और अराबा गांव का दौरा किया. इसके बाद जेरला स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और बिठूजा उपचार संयंत्र का भी निरीक्षण किया गया. टीम ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि सीवरेज लाइनों में फैक्ट्रियों का केमिकल युक्त पानी किसी भी हाल में नहीं मिलना चाहिए. विशेष रूप से उन टैंकरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया गया जो रात के अंधेरे में अवैध रूप से केमिकल पानी सीवरेज में डाल रहे हैं.
HRTS प्लांट बंद करने के आदेश
टीम ने लूनी नदी के किनारे स्थित सीईटीपी (CETP) के एचआरटीएस प्लांट को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया. जिला कलेक्टर को तत्काल प्रभाव से इस प्लांट को बंद करने और वहां जमा स्लज (अपशिष्ट) को हटाने के निर्देश दिए गए हैं. निरीक्षण के दौरान राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB) के अधिकारियों को भी खरी-खोटी सुनाई गई और प्रदूषण मानकों की शत-प्रतिशत पालना सुनिश्चित करने को कहा गया है.
पर्यावरण से खिलवाड़ अब नहीं चलेगा
सुप्रीम कोर्ट की इस टीम ने स्पष्ट कर दिया है कि औद्योगिक विकास के नाम पर पर्यावरण से खिलवाड़ अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. टीम ने अपशिष्ट जल के शोधन और डिस्चार्ज की निगरानी के लिए एक अधिक प्रभावी तंत्र बनाने पर जोर दिया. जिला प्रशासन और उद्योग संचालकों को चेतावनी दी गई है कि यदि सुधार में लापरवाही बरती गई तो जिम्मेदार अधिकारियों और फैक्ट्री मालिकों पर सख्त कार्रवाई होगी.