JLF 2026: 'मशीन बताएगी आपके दिल में कितनी दया है!' नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी की इस भविष्यवाणी ने दुनिया को चौंकाया

Jaipur Literature Festival: क्या मोबाइल ऐप से मापा जाएगा आपका चरित्र? जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में कैलाश सत्यार्थी ने भविष्य के उस 'डिजिटल मीटर' की भविष्यवाणी की है जो इंसानी करुणा को स्कैन करेगा.

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जेएलएफ 2026 में तकनीक और करुणा के संगम पर बोलते कैलाश सत्यार्थी.
X@JaipurLitFest

Rajasthan News: क्या भविष्य में आपका स्मार्टफोन यह तय करेगा कि आप कितने अच्छे इंसान हैं? जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF 2026) के मंच से शनिवार को नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi) ने एक ऐसी भविष्यवादी (Futuristic) घोषणा की है, जिसने तकनीक और मानवता के विशेषज्ञों के बीच हलचल पैदा कर दी है. सत्यार्थी ने भविष्यवाणी की है कि जल्द ही दुनिया में 'करुणा मापने वाला ऐप' (Compassion Measuring App) दस्तक देगा, जो किसी भी व्यक्ति के भीतर छुपे संवेदना के स्तर को स्कैन कर सकेगा.

डिजिटल होगा 'करुणा' का मीटर!

सत्यार्थी ने जेएलएफ में चर्चा के दौरान कहा कि इंसानियत एक ऐसे डिजिटल दौर की ओर बढ़ रही है, जहां भावनाओं को भी डेटा के जरिए नापा जाएगा. उन्होंने बताया कि यह ऐप आपको यह स्पष्ट कर देगा कि सामने खड़ा व्यक्ति आपके प्रति वास्तव में कितनी सहानुभूति और 'कंपैशन' रखता है. यह केवल एक तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि गिरते मानवीय मूल्यों के बीच एक डिजिटल आईना होगा.

सिर्फ इंसान नहीं, बेजुबानों के लिए भी धड़के दिल

सुप्रीम कोर्ट में चल रही आवारा कुत्तों की सुनवाई का जिक्र करते हुए सत्यार्थी ने करुणा के दायरे को और व्यापक बनाने की वकालत की. उन्होंने कहा, 'करुणा केवल इंसानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि हमें हर जीव के प्रति संवेदनशील होने की जरूरत है.' सत्यार्थी ने 'कंपैशन ज्यूडिशियरी' का विचार पेश किया. उन्होंने जोर दिया कि आज राजनीति, मीडिया और कॉर्पोरेट सेक्टर को भी 'करुणामई लीडरशिप' की सख्त जरूरत है.

बांग्लादेश संकट: साजिश का बड़ा खुलासा

इसी मंच से कैलाश सत्यार्थी ने बांग्लादेश के ताजा हालातों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की बड़ी बात कही. उन्होंने पड़ोसी देश में मची उथल-पुथल को केवल एक आंतरिक विद्रोह मानने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा, 'बांग्लादेश में जो हो रहा है, उसके पीछे बाहरी ताकतें सक्रिय हैं. यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह वहां के समाज और इकॉनमी के लिए भी घातक है. हम सब कुछ केवल यूनुस के भरोसे नहीं छोड़ सकते.'

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