Rajasthan News: राजस्थान के करौली जिले में झोलाछाप और तथाकथित बंगाली डॉक्टरों का जाल एक गंभीर समस्या बन चुका है. हाल ही में नादौती क्षेत्र के रोसी गांव में पांच वर्षीय मासूम अक्षय जाटव की दर्दनाक मौत ने इन नीम-हकीमों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. इस घटना में सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें रिपोर्ट दर्ज होने बाद भी अभी तक कोई कारवाई नहीं है. जबकि झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही की वजह से एक मासूम की जान चली गई. परिजनों का आरोप है कि झोलाछाप डॉक्टर गिरधारी ठाकुर द्वारा किए गए गलत इलाज के कारण बच्चे ने दम तोड़ दिया.
मौत के बाद भी कार्रवाई में देरी से बढ़ा गुस्सा
मासूम अक्षय की मौत के बाद उसके परिजनों ने नादौती थाने में शिकायत दर्ज कराई. आरोप है कि इलाज में बरती गई लापरवाही के चलते बच्चे की जान गई, लेकिन घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी ठोस कार्रवाई न होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है. हालांकि मामले का पोस्टमार्टम हो चुका है, लेकिन रिपोर्ट आने का इंतजार है ताकि मौत का सही कारण स्पष्ट हो सके. ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसे झोलाछाप डॉक्टर आर्थिक प्रभाव और स्थानीय पकड़ का इस्तेमाल कर अक्सर मामलों को दबा देते हैं, जिससे पीड़ित परिवार न्याय से वंचित रह जाते हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
कार्यवाहक सीएमएचओ डॉ. सतीश मीना ने बताया कि निदेशालय के निर्देशानुसार हर ब्लॉक स्तर पर SDO, BCMO और ड्रग इंस्पेक्टर की एक कमेटी बनाई गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के तहत बिना वैध पंजीकरण के अस्पताल या लैब चलाना दंडनीय अपराध है.
साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि एलोपैथी इलाज का अधिकार केवल पंजीकृत एलोपैथी डॉक्टरों को है. नीम-हकीम केवल आयुर्वेदिक दवाएं ही दे सकते हैं. डॉ. मीना ने आश्वासन दिया कि रोसी गांव मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित कर दी गई है और दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कर सख्त जुर्माना लगाया जाएगा.
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