Panchna Dam Dispute: करौली में फिर सुलग रही 'गुर्जर-मीणा' वर्चस्व की आग, हाईकोर्ट के आदेश से 20 साल पुराना कलह ताजा

करौली जिले में स्थित पांचना बांध का पानी अब सिर्फ सिंचाई का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह दो समुदायों के बीच पुरानी सामाजिक और राजनीतिक दरारों को फिर से गहरा कर रहा है.

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Panchna Dam Dispute
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Panchna Dam Dispute: राजस्थान के करौली जिले में स्थित पांचना बांध का पानी अब सिर्फ सिंचाई का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह दो समुदायों के बीच पुरानी सामाजिक और राजनीतिक दरारों को फिर से गहरा कर रहा है. राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा 1 मई तक नहरों में पानी छोड़ने के सख्त आदेश के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है. प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती हाईकोर्ट के आदेश की पालना और जमीनी स्तर पर गुर्जर-मीणा समुदाय के बीच संतुलन बनाए रखने की है.

 20 साल पुरानी 'तोप' और संघर्ष की टीस

आपको बता दें कि गुर्जर आरक्षण आंदोलन की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि 2005 में गांव के इलाकों में हालात एक बार फिर बिगड़ गए. एक तरफ पंचना डैम के पास रहने वाले किसान सरकार पर अपनी मांगें थोपने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ किरोड़ी लाल मीणा की लीडरशिप में मौच्या गांव के हजारों किसान इकट्ठा होकर पंचना की ओर बढ़ने लगे. इस आंदोलन ने दोनों समुदायों के बीच सीधा टकराव पैदा कर दिया. चश्मदीदों का तो यह भी दावा है कि मार्च के दौरान एक कामचलाऊ तोप चलाई गई, जिससे दो लोगों की मौत हो गई और कई दूसरे घायल हो गए. इसके बाद, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) और सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) का तुरंत ट्रांसफर कर दिया गया. हालांकि, 20 साल पहले जो दरार पैदा हुई थी, वह आज भी नहीं मिट पाई है.

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प्रभावित गांवों और कमांड एरिया के बीच 'हक' की लड़ाई है

पांचना बांध करौली और सवाई माधोपुर के 35 गांवों की करीब 9,985 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए बनाया गया था. लेकिन 2005 के बाद से नहरों में पानी नहीं पहुंच पाया. दूसरी ओर, बांध से प्रभावित 39 गांवों का दावा है कि उनकी जमीन डूब क्षेत्र में गई, इसलिए पानी पर पहला हक उनका है. इस बारे में “गुड़ला-पांचना संघर्ष समिति” का कहना है कि सभी प्रभावित गांवों को लिफ्ट परियोजना के जरिए पानी नहीं मिलेगा. आज भी यही कहना है कि प्रथम अधिकार 39 गांवों का है. उनके साथ छल हुआ है राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण उनकी 39 गांवों की योजना को मात्र 13 गांव की योजना तक सीमित कर दिया गया.

गुर्जर-मीणा आमने सामने
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भेदभाव न हुआ होता, तो आज विवाद की स्थिति नहीं बनती

कांग्रेस विधायक रामकेश मीणा के कार्यकाल (2008-2013) के दौरान लिए गए फैसलों पर अब सवाल उठ रहे हैं. आरोप है कि उनके समय 39 गांवों के बजाय केवल 13 गांवों को ही नहर योजना से जोड़ा गया, जिससे बाकी गांवों में भारी आक्रोश है. स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि तब भेदभाव न हुआ होता, तो आज विवाद की स्थिति नहीं बनती.

हाईकोर्ट का अल्टीमेटम, 1 मई तक छोड़ना होगा पानी

हाईकोर्ट ने अपनी पिछली सुनवाई में जल संसाधन विभाग को दोटूक कहा है कि 1 मई तक नहरों में पानी हर हाल में पहुंचना चाहिए. यदि ऐसा नहीं हुआ, तो विभाग के आला अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होकर जवाब देना होगा. इस आदेश ने प्रशासन पर भारी दबाव बना दिया है, क्योंकि पिछले 20 सालों से ये नहरें सूखी पड़ी हैं.

'पहले हक' बनाम 'सिंचाई के अधिकार' की है लड़ाई

पांचना बांध का मुद्दा अब “पहले हक” बनाम “सिंचाई का अधिकार” की बहस में बदल गया है. एक तरफ कमांड एरिया के किसान हैं, जो दो दशक से पानी का इंतजार कर रहे हैं. दूसरी ओर बांध प्रभावित गांव हैं. अब देखना होगा कि बांध का पानी नहरों में खुलता है या नहीं। स्थिति यह है कि जैसे ही नहर खोलने की बात होती है, गुर्जर-मीणा समुदायों के बीच पुराना तनाव फिर उभर आता है.

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