ACB का PWD के 3 इंजीनियर-ठेकेदार पर बड़ा एक्शन, बिना सड़क बनाए करा लिया था भुगतान

प्रतापगढ़ जिले के लेवापाड़ा, हीरापाड़ा और जाप कॉलोनी में सड़क निर्माण के दौरान घटिया सामग्री के इस्तेमाल की एसीबी को शिकायत मिली थी. साथ ही कुछ तो बिना निर्माण के ही भुगतान करा लेने की शिकायत प्राप्त हुई, जिसकी जांच के बाद एसीबी ने अब बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है.

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ACB का PWD के 3 इंजीनियर-ठेकेदार पर बड़ा एक्शन
Gemini

राजस्थान में घूसखोरों और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ लगातार एसीबी की कार्रवाई जारी है. एक के बाद एक घूस लेने वालों की गिरफ्तारी हो रही है. इसी बीच 13 साल पुराने भ्रष्टाचार के मामले में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. कोटा एसीबी ने भ्रष्टाचार से जुड़े 13 साल पुराने केस में पीडब्लूडी (PWD) के 3 इंजीनियर और ठेकेदार को गिरफ्तार किया है. एसीबी की जांच में पता चला कि अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से 11 लाख रुपये से अधिक की सरकार को चपत लगाई थी.

घटिया सड़क निर्माण पर हुई गिरफ्तारी

एसीबी के मुताबिक, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत साल 2013 में घटिया सड़क निर्माण मामले में प्रतापगढ़ से तीन रिटायर्ड इंजीनियर और संवेदक की गिरफ्तार हुई. गिरफ्तारी के बाद सभी को कोर्ट में पेश करके जेल दिया गया. एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर कोटा रेंज की टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया. जानकारी के मुताबिक, मामला प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत प्रतापगढ़ जिले में बनाई गई संपर्क सड़कों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है.

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बिना बनाए बिल भुगतान की मिली थी शिकायत

एसीबी रेंज कोटा प्रभारी DIG ओम प्रकाश मीणा ने बताया कि लेवापाड़ा, हीरापाड़ा और जाप कॉलोनी में सड़क निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री उपयोग करने, सड़कें निर्माण के दौरान ही क्षतिग्रस्त होने, निर्माण काम पूरा होने से पहले ही फर्जी पूर्णता दिखाकर बिल भुगतान कराने और कुछ कार्य बिना निर्माण के ही भुगतान लेने की शिकायत मिली थी. शिकायत के आधार पर 19 जुलाई 2013 को एसीबी चौकी प्रतापगढ़ ने आकस्मिक जांच की थी, जिसके बाद 18 नवंबर 2013 को मामला दर्ज किया गया.

एसीबी की जांच में पाया गया कि अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से सरकार को 11 लाख 78 हजार 752 रुपए की आर्थिक हानि पहुंचाई गई. इस पूरे मामले की जांच कोटा एसीबी के एडिशनल एसपी विजय स्वर्णकार ने की. एसीबी कोटा इकाई ने जांच में तत्कालीन अधिशासी अभियंता (XEN) सायरमल मीणा, एनएल परमार, गिरधारीलाल वर्मा और संवेदक विनोद कोड़िया को गिरफ्तार कर प्रतापगढ़ की विशेष अदालत में पेश किया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

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