Kota Medical College Case: कोटा अस्पताल में प्रसूताओं की मौत पर कलेक्टर सख्त, मेडिकल कॉलेज ने स्टाफ को दी क्लीन चिट, जांच जारी

कोटा मेडिकल कॉलेज में सिजेरियन के बाद दो प्रसूताओं की मौत से हड़कंप मचा हुआ है. कलेक्टर पीयूष सामरिया ने सख्त जांच के आदेश दिए है, जबकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने स्टाफ को क्लीन चिट दे दी है.

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Kota Medical College Case
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Rajasthan News: राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद दो प्रसूताओं की मौत का मामला अब प्रशासनिक और मेडिकल कॉलेज प्रशासन के बीच विरोधाभासों में उलझता नजर आ रहा है. जहां एक ओर जिला प्रशासन मामले की हर एंगल से जांच की बात कह रहा है, वहीं अस्पताल प्रबंधन ने शुरुआती जांच में अपने स्टाफ को क्लीन चिट दे दी है.

 किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा- डीएम

जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया ने स्पष्ट किया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दो अलग-अलग टीमें जांच कर रही हैं. उन्होंने बताया कि एक टीम स्थानीय स्तर पर और दूसरी विशेषज्ञ टीम जयपुर से आकर जांच में जुटी है. कलेक्टर ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब 3 मई को भर्ती के समय महिलाओं की स्थिति सामान्य थी, तो अचानक तबीयत बिगड़ने का कारण क्या रहा? उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि मेडिकल प्रोटोकॉल में कोई भी लापरवाही पाई गई, तो संबंधित डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी.

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मानवीय भूल नहीं, मेडिकल कॉम्प्लिकेशन

वहीं दूसरी ओर, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और सुपरिटेंडेंट डॉ. नीलेश कुमार जैन का बयान प्रशासन से अलग नजर आ रहा है. उन्होंने कहा कि अब तक की शुरुआती पड़ताल में स्टाफ की ओर से किसी भी तरह की मानवीय लापरवाही या कोताही सामने नहीं आई .  डॉ. जैन के मुताबिक, मृतका पायल का ब्लड प्रेशर अचानक कम हुआ था, जिससे 'रीनल फेलियर' (किडनी फेल होना) की स्थिति बनी. उन्होंने दावा किया कि स्टाफ ने तत्काल प्रभाव से मरीज को ICU में शिफ्ट कर उपचार शुरू किया था.

4 प्रसूताओं की हालत अब भी गंभीर

अस्पताल प्रशासन ने स्वीकार किया कि प्रभावित 6 महिलाओं में से 4 की हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है.  विशेषज्ञों की देखरेख में उनका इलाज जारी है. सुपरिटेंडेंट ने कहा कि यदि परिजन चाहेंगे, तो बेहतर इलाज के लिए मरीजों को जयपुर भी रेफर किया जा सकता है.

मामले को दबाने की जा रही है कोशिश

मृतक महिलाओं के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर सीधा प्रहार किया है. उनका आरोप है कि ऑपरेशन के बाद समय पर मॉनिटरिंग नहीं की गई और अब अस्पताल प्रशासन अपनी गलती छिपाने के लिए गोलमोल जवाब दे रहा है. परिजनों का कहना है कि यूरिन बंद होने और बीपी गिरने जैसी गंभीर समस्याओं को डॉक्टरों ने समय रहते गंभीरता से नहीं लिया.

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