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Exclusive: कोटा अस्पताल में प्रसूता की हालत क्यों बिगड़ी? NDTV के हाथ लगी सोनोग्राफी रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Ragini Sonography Report: NDTV राजस्थान के पास कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती एक प्रसूता की रिपोर्ट है, जिसमें उसकी तबीयत कैसे बिगड़ी इसका खुलासा हुआ है.

Exclusive: कोटा अस्पताल में प्रसूता की हालत क्यों बिगड़ी? NDTV के हाथ लगी सोनोग्राफी रिपोर्ट में हुआ खुलासा
कोटा के सबसे बड़े अस्पताल में एक साथ 6 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ी थी, जिनमें से 2 की मौत हो गई है.
NDTV Reporter

Rajasthan News: कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद प्रसूताओं की बिगड़ती हालत ने पूरे प्रदेश को चिंता में डाल दिया है. इस बीच, अस्पताल में भर्ती प्रसूता रागिनी की मेडिकल रिपोर्ट सामने आई है, जिसने इलाज की गुणवत्ता पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं. NDTV राजस्थान के पास मौजूद रागिनी की सोनोग्राफी रिपोर्ट में शरीर के अंदरूनी अंगों पर हुए खतरनाक असर और पेट में फ्लूड जमा होने जैसे चौंकाने वाले संकेत मिले हैं.

इंफेक्शन से किडनी पर असर

परिजनों से मिली इस रिपोर्ट के अनुसार, रागिनी की दोनों किडनी में इनक्रीस्ड इकोजेनिसिटी (Increased Echogenicity) पाई गई है. डॉक्टरी भाषा में इसका सीधा मतलब किडनी पर किसी गंभीर संक्रमण या डैमेज से है. यही मुख्य कारण माना जा रहा है कि ऑपरेशन के बाद कई महिलाओं का यूरिन बंद हो गया और उनमें किडनी फेल होने जैसे लक्षण नजर आने लगे. रिपोर्ट इशारा कर रही है कि इंफेक्शन ने सीधे किडनी पर असर किया.

पेट के अंदर जमा हुआ खून जैसा तरल

सोनोग्राफी की यह रिपोर्ट और भी डरावनी हो जाती है जब इसमें मॉडरेट हेमोपेरिटोनियम (Moderate Hemoperitoneum) का जिक्र आता है. रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर 'ब्लड ऑन एस्पिरेशन' लिखा गया है, जिसका अर्थ है कि रागिनी के पेट के भीतर से खून जैसा तरल पदार्थ मिला है. इसके साथ ही पेट की गुहा (Peritoneal Cavity) में असामान्य मात्रा में तरल जमा था और डिलीवरी के बाद गर्भाशय का आकार भी सामान्य से काफी बड़ा पाया गया, जो शरीर के भीतर मची हलचल को दर्शाता है.

लिवर पर भी दिखा बीमारी का असर

सिर्फ किडनी ही नहीं, इंफेक्शन की मार रागिनी के लिवर पर भी पड़ी है. रिपोर्ट में माइल्ड हेपेटोमेगाली (Mild Hepatomegaly) दर्ज है, जिसका मतलब है कि संक्रमण की वजह से लिवर का आकार हल्का बढ़ गया है. परिजनों का आरोप है कि सिजेरियन के बाद से ही रागिनी की हालत बिगड़ रही थी और रात से ही यूरिन बंद होने की शिकायत थी, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने समय रहते सही मॉनिटरिंग और उपचार उपलब्ध नहीं कराया.

जांच के घेरे में लापरवाही का आरोप

जहां एक तरफ पीड़ित परिवार अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के सीधे आरोप लगा रहा है, वहीं मेडिकल कॉलेज प्रशासन अब तक किसी भी मानवीय चूक से इनकार कर रहा है. प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की हाई लेवल जांच की जा रही है और स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स की एक टीम हर मेडिकल पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही है. हालांकि, रागिनी की यह रिपोर्ट उस अनदेखी की ओर इशारा कर रही है, जिसने कई प्रसूताओं की जान जोखिम में डाल दी.

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