कोटा-झालावाड़ हाईवे पर 5 घंटे से लगा जाम, एंबुलेंस और वाहन फंसे; मरीजों की सांसें अटकी

हाईवे पर घंटों जाम में वाहन फंसे रहते हैं. एंबुलेंस तक नहीं न‍िकल पाती है, मरीजों को सबसे अध‍िक परेशानी होती है. 

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कोटा-झालावाड़ नेशनल हाईवे-52 पर दरा घाटी पर लगा जाम.

कोटा-झालावाड़ नेशनल हाईवे-52 पर दरा घाटी इन दिनों आमजन के लिए मुसीबत का कारण बन चुकी है. यहां लगने वाले भीषण जाम ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. हालात ऐसे हैं कि यात्री, स्थानीय लोग और यहां तक कि मरीज भी घंटों सड़क पर फंसे रहने को मजबूर हैं. राजस्थान के कोटा-झालावाड़ को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे-52 इन दिनों दरा घाटी में ट्रैफिक जाम के कारण सुर्खियों में है. मुकंदरा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में सड़क का सिंगल लेन होना, इस समस्या की सबसे बड़ी वजह बन गया है.

10 किलोमीटर लंबा जाम 

यहां रोजाना करीब 50 हजार वाहन गुजरते हैं, लेकिन संकरी सड़क के कारण थोड़ी सी भी बाधा पूरे ट्रैफिक सिस्टम को ठप कर देती है. यदि कोई भारी वाहन खराब हो जाए, तो 10 से 20 किलोमीटर लंबा जाम लगना आम बात हो गई है. 

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कई बार 26 घंटे जाम लगा रहता है 

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई बार 26 से 36 घंटे तक जाम लगा रहता है. इस दौरान एंबुलेंस में मरीजों की हालत बिगड़ने तक की नौबत आ जाती है. पुलिस प्रशासन मौके पर मौजूद रहकर वन-वे ट्रैफिक को धीरे-धीरे निकालने की कोशिश करता है, लेकिन यह समाधान नाकाफी साबित हो रहा है.

दरा घाटी में जाम प्रशासन के लिए चुनौती 

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, और अब यह जनजीवन को सीधे प्रभावित कर रही है. परेशान होकर लोगों ने कई बार विरोध प्रदर्शन भी किया है. दरा घाटी का यह ट्रैफिक जाम अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि एक गंभीर जनसमस्या बन चुका है. स्थानीय निवासियों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द वन विभाग से अनुमति लेकर सड़क चौड़ीकरण और अंडरब्रिज निर्माण का कार्य शुरू करें, ज‍िससे हजारों लोगों को इस परेशानी से राहत मिल सके. फिलहाल दरा घाटी में जाम की यह स्थिति प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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