Rajasthan News: देश की शिक्षा नगरी कहे जाने वाले कोटा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों और अभिभावकों के साथ एक महत्वपूर्ण संवाद किया. श्रीराम रंगमंच पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की संभावनाओं पर मंथन करना था. राहुल गांधी ने करीब 45 मिनट तक सीधे संवाद किया और युवाओं की चुनौतियों को करीब से समझा.
'सिस्टम में बदलाव की जरूरत'
संवाद के दौरान राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक तीखी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि "मौजूदा एजुकेशन सिस्टम बच्चों के सपनों को पूरा करने वाला नहीं रह गया है और यह कई जगहों पर एक्सटॉर्शन मशीन में बदल गया है." राहुल ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का असली उद्देश्य छात्रों को अवसर देना और उनके सपनों को उड़ान देना है, न कि उन्हें किसी दबाव तंत्र का हिस्सा बनाना.
नारेबाजी के बीच संयम और संवाद
कार्यक्रम के दौरान एक दिलचस्प वाकया तब हुआ जब कुछ कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू की. राहुल गांधी ने तत्काल संवाद रोककर स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक आयोजन नहीं है. उन्होंने कहा कि "यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में मौजूद कमियों को समझने और उसे बेहतर बनाने का प्रयास है." उन्होंने कार्यकर्ताओं को शांत रहने की हिदायत दी और पूरी गंभीरता के साथ छात्रों की बात सुनी.
मंच की सादगी और भविष्य पर जोर
इस कार्यक्रम में एक खास बात यह रही कि मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सचिन पायलट और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली जैसे दिग्गज नेता मौजूद तो थे, लेकिन वे मुख्य संवाद से पूरी तरह दूर रहे. राहुल गांधी ने पूरी तरह छात्रों और अभिभावकों पर ध्यान केंद्रित किया. कोटा की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि कोटा पर पूरे देश को गर्व है. अंत में, उन्होंने री-नीट देने वाले छात्रों को शुभकामनाएं दीं और उनके साथ सेल्फी लेकर कार्यक्रम का समापन किया.
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