मैली धोती कुर्ते वाले किसान ने सांवलिया सेठ को दान कर दी 3 करोड़ की ज़मीन

श्री सांवलिया मंदिर मंडल के प्रशासनिक अधिकारी राजेन्द्र सिंह ने बताया कि डूंगरपुर के भक्त अमरजी ने सांवलियाजी को जमीन देने का आग्रह किया था. इसके बाद उसने जमीन के दस्तावेज मंगाए और सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार कर 23 जुलाई को आसपुर पहुंचे जहां आवश्यक कार्यवाही के बाद रजिस्ट्री करवा दी गई. 

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सांवलिया सेठ को तीन करोड़ की संपत्ति दान की.
NDTV
चित्तौड़गढ़:

भगवान कृष्ण के सहपाठी सुदामा की कथा तो आप सभी ने सुनी ही होगी. कृष्ण के साथ पढ़ने वाले सुदामा बेहद गरीबी में पत्नी के तानों के बाद 3 मुठ्‌ठी चावल लेकर द्वारकाधीश से मिलने पहुंचे थे. कृष्ण-सुदामा की दोस्ती की मिसाल पूरी दुनिया में दी जाती है. सुदामा जैसी ही एक कहानी राजस्थान से सामने आई है. जहां कृष्ण के प्रति भक्ति के मामले में एक आधुनिक सुदामा ने करीब तीन करोड़ की संपत्ति सांवलिया सेठ को अर्पित किया गया. मैली धोती और कुर्ते में डूंगरपुर जिले के एक किसान ने भगवान सांवलिया सेठ के नाम पर अपनी जमीन और मकान नाम कर दिया. इस सम्पत्ति का मूल्य करीब 3 करोड़ रुपए बताया जाता है. 

कई बार चक्कर लगाए, फिर पूरी हुई दान की प्रक्रिया

हालांकि सांवलिया सेठ को 3 करोड़ का दान देने वाले सुदामा ने 10 साल में इस दान के लिए 100 से ज्यादा चक्कर सांवलियाजी और चित्तौड़गढ़ के लगाए. डूंगरपुर जिले के आसपुर के खेड़ा सामोर निवासी अमरजी गौतम पाटीदार पुत्र गौतम ने सारी दिक्कतें झेलने के बाद भी आखिर अपनी जमीन भगवान के नाम कर ही दी है.

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23 जुलाई को भगवान के नाम हुई जमीन की रजिस्ट्री

श्री सांवलिया मंदिर मंडल के प्रशासनिक अधिकारी राजेन्द्र सिंह ने बताया कि डूंगरपुर के भक्त अमरजी ने सांवलियाजी को जमीन देने का आग्रह किया था. इसके बाद उसने जमीन के दस्तावेज मंगाए और सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार कर 23 जुलाई को आसपुर पहुंचे जहां आवश्यक कार्यवाही के बाद रजिस्ट्री करवा दी गई. 

इस दौरान मंदिर के सम्पदा प्रभारी भैरू गिरी, श्रवण शर्मा और गिरदावर गोपाल सिंह भी साथ थे. उन्होंने यह भी बताया कि करीब 16 में से 10.15 बीघा जमीन की रजिस्ट्री की गई है. वहीं उन्होंने शेष जमीन और मकान भी दान करने की पेशकश की है. 

सांवलिया सेठ को जमीन की रजिस्ट्री करते अमरजी गौतम.

भगवान कृष्ण के प्रति अटूट आस्था

दरअसल डूंगरपुर जिले के खेड़ा सामोर निवासी अमरजी के पिता का निधन दिसम्बर 2012 में हुआ और परिवार में केवल उनकी मां थी. अमरजी की भगवान कृष्ण के प्रति अटूट आस्था होने के चलते उन्होंने 2016 में सम्पत्ति दान करने का निर्णय लिया और वे इसके लिए सांवलिया जी और चित्तौड़गढ़ भी आए. कई बार मंदिर के सीईओ और मंडल के प्रतिनिधियों से मिलने के बावजूद जमीन भगवान के नाम नहीं हो पाई और अब जाकर प्रक्रिया पूरी हुई है. 

सपना हुआ पूरा, गौशाला खोलने की आस

सांवलिया सेठ के भक्त अमरजी गौतम ने बताया कि वे पिछले 10 साल से लगातार जमीन दान करने की कोशिशों में जुटे थे. तत्कालीन अधिकारियों से कई बार मिले लेकिन हाल ही में मंदिर मंडल के मुख्य निष्पादन अधिकारी दिनेश धाकड़ ने सकारात्मक रूख दिखाया और जमीन की रजिस्ट्री हुई है. उन्होंने बताया कि खेत पर 30 आम के पेड़ है लेकिन वे आम नहीं बेचते है और अब उन्हें आस है कि मंदिर मंडल यहां गौशाला खोलेगा.

करीब 3 करोड़ की संपत्ति, बाड़े और मकान का भी होगा दान

उन्होंने बताया कि वे जुलाई माह में ही 6 बार सांवलियाजी आ चुके है और 23 जुलाई को उनकी जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी हुई है. उन्होंने बताया कि इस सम्पत्ति में से डेढ़ बीघा आबादी भूमि है. वहीं रोड के किनारे बाड़ा और मकान है. ऐसे में कृषि भूमि और सब मिलाकर करीब 3 करोड़ की सम्पत्ति है. 

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उन्होंने यह भी बताया कि अब उनके परिवार में कोई नहीं है. पिता के बाद मां का निधन हो गया था. जिनके एक किलो चांदी के आभूषण है जो अपने परिचित के यहां रखवाए है. इन्हें भी वे भगवान सांवलिया सेठ के चढ़ा देंगे. 

सांवलिया सेठ को दान करने वाले किसान ने क्या कहा

सांवलियाजी को सर्वस्व दान करने वाले भक्त अमरजी ने बताया कि जब वे जमीन के दस्तावेज लेकर आए तो जमीन पर ऋण था और अलग-अलग खातों में जमीन थी. तब उनकी कई लोगों ने मदद की. डूंगरपुर की तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी गिरजा मेडम ने एक साथ करने के लिए 50 हजार रुपए दिए थे. 

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वहीं ऋण उतारने के लिए भरत रावल ने सवा लाख व केवल जी ने 25 हजार रुपए दिए थे. ऋण भार से मुक्त करवाकर अब यह जमीन भगवान के नाम कर दी गई है. 

मन्दिर मण्डल के सीईओ दिनेश चंद्र धाकड़ ने कहा कि- मेरे डूंगरपुर अतिरिक्त कलक्टर होने के दौरान अमरजी मेरे पास आए थे और जमीन दान करने की इच्छा जताई थी. तब मैनें तत्कालीन सीईओ के पास इन्हें भेजा था, लेकिन किन्हीं कारणों से रजिस्ट्री नहीं हो पाई. लेकिन मेरे सीईओ रहते समय जब वे आए तो यह प्रक्रिया पूरी करवा ली है और जमीन की रजिस्ट्री सांवलिया सेठ के नाम पर हो गई है. इसके लिए अमरजी का आभार व्यक्त किया है. 

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