शिक्षा मंत्री मदन दिलावर एक बार फिर से टोंक में बेबाक अंदाज में भाषण देते नजर आए. खटीक समाज अधिकारी-कर्मचारी द्वारा आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह के दौरान मदन दिलावर ने स्कूल में शिक्षकों के व्यवहार को मर्यादित ओर संस्कारी बनाने पर जोर देते हुए कहा कि टीचर किधर देख रहा, क्या कर रहा. इन सबका बच्चों पर प्रभाव पड़ता है. शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि हम छोटी सी छोटी पंचायत को साफ सफाई के लिए प्रति माह एक लाख रुपए देते हैं, कोई पंचायतें नहीं करती हैं तो हम उन्हें दंडित भी करते हैं. कई बार मंत्री कन्हैया लाल जी, जिलाध्यक्ष चंद्रवीर जी नाराज हो जाते और कहते हैं कि ये तो हमारी पार्टी का सरपंच था क्यों कार्रवाई कर दी, मामाजी का लड़का था क्यों कार्रवाई कर दी. इसके खिलाफ कार्रवाई क्यों कर दी, लेकिन मैं किसी को छोड़ता नहीं हूं, गंदगी ठीक नहीं है.
लापरवाही पर मदन दिलावर सख्त
मदन दिलावर ने सफाई को लेकर कहा कि गंदगी बीमारियां करती हैं और ये बीमारियां हमारा अस्पताल में ले जाकर पैसा खर्च करवाती है. बीमारियां कभी कभी मार भी देती है. इसलिए हम लोगों को मरना नहीं देखना चाहते है. इसलिए हम राजस्थान को खूब साफ सुधरा दिखना चाहिए चाहते हैं. इसलिए हमने सब अधिकारियों को कहा कि कह रखा है कि राजस्थान साफ सुधरा दिखना चाहिए. इसमें जो लापरवाही करेगा, उसे एक बार तो चेतावनी देंगे और दूसरी बार छोड़ेंगे नहीं, चाहे खटीक समाज को हो या मंत्री कन्हैया लाल जी के समाज का ही क्यों नहीं हो. किसी भी समाज का हो, किसी को छोड़ेंगे नहीं, उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे.
मदन दिलावर ने आगे कहा कि हमने बहुत सारी गालियां भी खाई हैं. अध्यापक मेरे से बहुत नाराज हैं, पता नहीं ये कौन-कौन से नियम लाता रहता है. कौन-कौन सी बात कहता रहता है. कभी तो कहता है कि मोबाइल स्कूल में लेकर नहीं आईए. कभी कहता है, 80 में से 40 नंबर लाना पड़ेगा. कभी कहता शराब पीने वाले और गुटका खाने वाले की सूची बनाइए, हां ये सब जरूरी हो गया.
प्राइवेट स्कूल में बच्चों को पढ़ाने पर शिक्षकों पर भड़के शिक्षा मंत्री
मंत्री ने कहा कि मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं कि जो लोग शिक्षा के क्षेत्र में हैं अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजे. जो शिक्षक अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेज रहे तो समझ लेना कि वह फ्री का वेतन ले रहा है. इसलिए तो वह अपने विद्यालय में पढ़ाना नहीं चाहता. वो भी ट्रेंड शिक्षकों से नहीं, अनट्रेंड शिक्षकों से पढ़ाना चाहता. जिसने न एसटीसी की है, न बीएड की है. जो सरकारी टीचर अपने बच्चों को निजी विद्यालय में पढ़ा रहे हैं तो मैं समझूंगा कि निकम्मापन कर रहे हैं.
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