बांसवाड़ा के 100 द्वीपों का नाम "रामायण" के पात्रों पर रखने को लेकर वागड़ में शुरू हुई "महाभारत", जानें किसने किया विरोध

बांसवाड़ा में करीब 100 छोटे-छोट द्वीप है. अब उनका नामकरण रामायण के पात्रों के नाम पर करने की बात हो रही है. भारतीय आदिवासी पार्टी के विधायक राजकुमार रोत ने इसका विरोध किया है.

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100 islands of Banswara: जब से बांसवाड़ा रेंज संभागीय आयुक्त नीरज के पवन ने माही बांध के बैक वॉटर में स्थित टापुओं का नामकरण रामायण के पात्रों पर करने की बात कही है तब से इस पर सियासत तेज हो गई है. बांसवाड़ा सहित डूंगरपुर, उदयपुर और प्रतापगढ़ जिले में इसके समर्थन और विरोध में स्वर उभरने लगे हैं.

संभागीय आयुक्त नीरज के पवन द्वारा इस बारे X पर पोस्ट किया था. उसको रिपोस्ट करते हुए चौरासी विधायक राजकुमार रोत ने इसका विरोध किया करते हुए कहा, टापुओं का नामकरण रामायण के पात्रों पर न करके आदिवासी समाज के महापुरुषों के नाम किया जाए.

राजकुमार रोत लिखा, आयुक्त साहब आप एक अच्छे IAS अधिकारी हो, यहां के युवाओं में आपकी एक अच्छी इमेज है, लेकिन आपके इस ट्विट का हम विरोध करते हैं. जो आज एक सुन्दर बांसवाड़ा है, उसके निर्माण में हजारों आदिवासियों ने अपनी शहादत दी है. द्वीपों का नामकरण होगा तो उनके नाम से होगा.

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इससे पहले, संभागीय आयुक्त नीरज के पवन ने लिखा था, 'बांसवाड़ा के 100 टापुओं (द्वीपों) का नामकरण रामायण के पात्रों पर किया जाएगा.आगामी सदियों तक इन द्वीपों को रामायण के पात्रों के नाम से जाना जाएगा, तो रामायण आपके और हमारे बीच में हमेशा जिंदा रहेगी.' इसके बाद भारत आदिवासी पार्टी और भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेताओं में बयानबाजी का दौर शुरू हो गया जो वागड़ से लेकर मेवाड़ और कांठल क्षेत्र तक पहुंच गया है. 

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भाजपा नेता ने रोत को दी रामचरित मानस पढ़ने की नसीहत 

टापुओं का नामकरण रामायण के पात्रों पर करने के समर्थन में पूर्व मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता धनसिंह रावत ने जारी एक बयान में कहा, भगवान राम हम सब के आराध्य हैं तो उनके नाम पर यदि टापुओं का नामकरण होता है तो इसका हम समर्थन करते हैं. रावत ने रोत को रामचरित मानस पढ़ने की नसीहत दी है. वहीं भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष शीतल भंडारी और युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष दीपसिंह वसुनिया ने भी विधायक राजकुमार रोत के बयानों का विरोध किया है.

 कई संगठनों ने विरोध और समर्थन में दिए ज्ञापन 

इस विवाद के गहराने के बाद कई संगठन विरोध और समर्थन में उतर आए हैं. वहीं कथा वाचक कमलेश भाई शास्त्री ने भी विधायक राजकुमार रोत के व्यक्तव्य का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि भगवान राम के बारे में किसी भी तरह की टिप्पणी करना अनुचित है. वहीं उदयपुर के कोटडा में भी इसको लेकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया. जबकि बांसवाड़ा और डूंगरपुर में भी ज्ञापन देकर टापुओं का नामकरण रामायण के पात्रों पर करने की मांग की गई है.

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