राजस्थान के पाली जिले के सांडेराव रोडवेज बस स्टैंड का एक वीडियो पिछले दिनों काफी वायरल हुआ था जिसमें बताया गया था कि महिला यात्रियों को शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा के लिए कितना संघर्ष करना पड़ता है. पिछले सप्ताह हरियाणा की एक महिला जोधपुर से रणकपुर जाते समय यहां रुकी थी और बस स्टैंड के टॉयलेट की हालत देखकर वह हैरान रह गई. महिला ने गंदगी से भरे शौचालय का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए तंज किया कि राजस्थान में लगभग हर सुविधा मिल सकती है लेकिन सार्वजनिक शौचालय नहीं. एनडीटीवी की टीम ने वीडियो वायरल होने के बाद सांडेराव रोडवेज बस स्टैंड पर सार्वजनिक शौचालय की स्थिति देख सच जानने का प्रयास किया.
शौचालय के पास पुरुष मूत्रालय बदहाल है
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बंद पड़ा है नवनिर्मित शौचालय
एनडीटीवी ने पाया कि सांडेराव रोडवेज बस स्टैंड पर नवनिर्मित शौचालय बंद पड़े हैं, जबकि पुरुषों के लिए बनाए गए मूत्रालय की स्थिति भी दयनीय है. वहां गंदगी पड़ी हुई थी और शराब की खाली बोतलें और अन्य कचरा भी देखा गया.
स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले बस स्टैंड पर पैसे देकर शौचालय की सुविधा मिलती थी. हालांकि वो टॉयलेट गंदे और बदहाल रहते थे. वहां मजबूरी में महिलाएं मुंह ढककर और सांस रोककर वहां जाती थीं. उस शौचालय को तोड़ दिया गया है और सांडेराव रोडवेज बस स्टैंड पर करीब 55 लाख रुपए की लागत से नए शौचालय का नवनिर्माण किया गया. लेकिन, पुराने शौचालय तोड़ दिए गए और नए शौचालयों पर ताला लटका हुआ है.
झाड़ियों की ओट में जाने को मजबूर महिलाएं
बस स्टैंड के आसपास आज भी कई महिलाएं झाड़ियों की ओट में शौच के लिए जाती दिखाई दीं. इस समस्या को लेकर जब बस स्टैंड पर मौजूद महिलाओं से बात की गई तो उनकी पीड़ा खुलकर सामने आई. एक अध्यापिका अपनी बात कहते हुए भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े. उन्होंने कहा,"सरकार कागजों में आंकड़े तो पूरे कर देती है लेकिन जमीन पर हालात बिल्कुल अलग हैं. महिलाएं सबके सामने कैसे जाएं?"
देखिए Viral video:-
एक बुजुर्ग ग्रामीण महिला ने भी आक्रोश जताते हुए कहा,"सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को ही होती है. पुरुष कहीं भी जा सकते हैं लेकिन महिलाओं के लिए यह बहुत मुश्किल है. पहले पांच से दस रुपए देकर भी गंदे शौचालय में जाना मजबूरी थी लेकिन अब तो वह भी बंद कर दिए गए हैं और नए बने शौचालयों पर ताला लगा हुआ है."
बंद पड़ा नवनिर्मित शौचालय Photo Credit: NDTV
बाकी जगहों की भी यही चुनौती
स्थानीय लोगों का कहना है कि सवाल सिर्फ सांडेराव का नहीं है बल्कि प्रदेश के कई बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के लिए शौचालय की स्थिति खराब है. जरूरत इस बात की है कि सरकार कागजों में लक्ष्य पूरे दिखाने के बजाय जमीन पर सुविधाओं को सही तरीके से संचालित कराए ताकि महिलाओं को बुनियादी गरिमा के साथ यात्रा करने की सुविधा मिल सके.
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