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राजस्थान में फर्जी डिग्री मामले में SOG का बड़ा एक्शन, गाजियाबाद से आरोपी की गिरफ्तारी के बाद खुलेंगे कई राज

फर्जी डिग्री गिरोह से जुड़े वीरेंद्र सिंह की गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क के अन्य आरोपियों का पता लगाया जा रहा है. उसे गाजियाबाद से अजमेर लाया गया है.

राजस्थान में फर्जी डिग्री मामले में SOG का बड़ा एक्शन, गाजियाबाद से आरोपी की गिरफ्तारी के बाद खुलेंगे कई राज
मेवाड़ यूनिवर्सिटी के डीन और अध्यक्ष की गिरफ्तारी के बाद वीरेंद्र सिंह पवार के नाम का खुलासा हुआ.

मेवाड़ यूनिवर्सिटी के फर्जी डिग्री मामले में एसओजी की बड़ी कार्रवाई हुई है. फर्जी डिग्री प्रिंट करने वाले आरोपी वीरेंद्र सिंह को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर अजमेर लाया गया है. वीरेंद्र सिंह की गिरफ्तारी के बाद कई बड़े खुलासे होने की संभावना है. जांच एजेंसी गिरोह के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए नेटवर्क की जांच में जुटी है. वीरेंद्र पर आरोप है कि उसने ही फर्जी डिग्रियां प्रिंट कर आरोपियों को दी थीं.

आरोपी 4 दिन की रिमांड पर 

गिरफ्तार आरोपी वीरेंद्र सिंह पवार को अजमेर की जिला न्यायाधीश संख्या-1 डॉ. रेनू श्रीवास्तव की अदालत में पेश किया गया. एसओजी के एडिशनल एसपी श्याम सुंदर विश्नोई ने बताया कि अदालत ने आरोपी को चार दिन की पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है. अब एसओजी आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है. जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि मेवाड़ यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्रियां किन-किन अभ्यर्थियों को उपलब्ध करवाई गई थीं और इस पूरे रैकेट में कौन-कौन लोग शामिल थे.  

2022 की भर्ती परीक्षा के बाद खुला मामला

मामले की जांच लोकसेवा आयोग की शिकायत के बाद शुरू हुई थी. आयोग ने बताया था कि स्कूल लेक्चरर (हिंदी) प्रतियोगी परीक्षा-2022 में चयनित दो युवतियों ने आवेदन के समय वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय की डिग्री बताई, लेकिन बाद में मेवाड़ यूनिवर्सिटी की डिग्री प्रस्तुत की. जांच में सामने आया कि दोनों ने एमए की फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी हासिल की.  

पूर्व प्रेसिडेंट समेत कई आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी 

मेवाड़ यूनिवर्सिटी के डीन और अध्यक्ष की भी गिरफ्तारी हो चुकी है. दोनों से पूछताछ के दौरान वीरेंद्र सिंह का नाम सामने आया था. इससे पहले सरकारी शिक्षक दलपत सिंह, डॉक्टर सुरेश विश्नोई और मेवाड़ यूनिवर्सिटी का पूर्व प्रेसिडेंट कौशल किशोर चन्द्रूल भी जेल भेजा जा चुका है. एसओजी को आशंका है कि इस नेटवर्क के जरिए कई अभ्यर्थियों को फर्जी डिग्रियां उपलब्ध करवाई गईं, जिनका उपयोग आरपीएससी भर्ती में किया गया. पूरे गिरोह और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है.

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